ज़िंदगी के रंग -62

समंदर ने पैरों के पास

अपने झागो के साथ

कुछ सीपियाँ ऐसे

ला कर

छोड़ गया ,

जैसे कुछ लौटा रहा है.

ज़िंदगी भी अक्सर बड़ी मासूमियत से

बहुत कुछ अचानक लौटा देती है.

ठीक ही कहते है ,

जो दो वह लौट कर ज़रूर आता है .

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