
Einstein’s Brain





पलक झपकते कभी कभी
कितना कुछ बदल जाता है .
कभी मन आँखों के रास्ते
बरस जाता है.
कभी आसमान के आँसू
बरसात बन बरस जाते है.
इन्हें पन्ने पर उतारने की कोशिश …..
शब्दों में बाँधने की हर कोशिश
बहा ले जाती है ये बरसाती बूँदे……

समंदर ने पैरों के पास
अपने झागो के साथ
कुछ सीपियाँ ऐसे
ला कर
छोड़ गया ,
जैसे कुछ लौटा रहा है.
ज़िंदगी भी अक्सर बड़ी मासूमियत से
बहुत कुछ अचानक लौटा देती है.
ठीक ही कहते है ,
जो दो वह लौट कर ज़रूर आता है .


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