बहुत अच्छी बात कही है हाफ़िज़ साहब ने जिसे समझना और दिल में उतारना बहुत मायने रखता है किसी भी इनसान के लिए । वसीम बरेलवी साहब की एक मक़बूल ग़ज़ल का पहला शेर है : ‘उसूलों पे जहाँ आँच आए, टकराना ज़रूरी है; जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है’ ।
बहुत अच्छी बात कही है हाफ़िज़ साहब ने जिसे समझना और दिल में उतारना बहुत मायने रखता है किसी भी इनसान के लिए । वसीम बरेलवी साहब की एक मक़बूल ग़ज़ल का पहला शेर है : ‘उसूलों पे जहाँ आँच आए, टकराना ज़रूरी है; जो ज़िन्दा हों तो फिर ज़िन्दा नज़र आना ज़रूरी है’ ।
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वाह !!! बहुत ख़ूब. आपके गीतों, ग़ज़लों के संग्रह को देख कर लगता है अपने इन्हें काफ़ी पढ़ा है .
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Simply taught life
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Indeed dear.
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