ना जाने कितने शब्द अौर विचार
जेहन में आते जाते रहते हैं ।
कुछ को पन्नों पर ऊतार दिया
अौर कुछ खो जाते है।
सोते या अर्ध निंद्रा में भी
कई विचार अाते जाते रहते है।
पकङ लिया तो अपने हैं
वरना सपने हैं।
ना जाने कितने शब्द अौर विचार
जेहन में आते जाते रहते हैं ।
कुछ को पन्नों पर ऊतार दिया
अौर कुछ खो जाते है।
सोते या अर्ध निंद्रा में भी
कई विचार अाते जाते रहते है।
पकङ लिया तो अपने हैं
वरना सपने हैं।
पकङ लिया तो अपने हैं. वरना सपने हैं। बहुत खूब लिखा है आप ने.
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पता नहीं आप मेरी बातों से कितना सहमत होंगे। मैंने अक्सर देखा है कि नींद या आधी नींद में बहुत से खूबसूरत अौर लाजवाब ख्याल आते रहते हैं। 🙂
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बिलकुल सही कहा आप ने
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आभार !
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हाँ, ये तो सच है; खूब लिखा है आपने.
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बस, मन के विचार लिख दिये। आपको पसंद आया , यह मेरे लिये खुशी की बात है। 🙂
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