सुनने वाले के लिये जो सिर्फ कहानियाँ हैं,
उनमें कितनी अौर कहानियाँ,
आँसू अौ मुस्कान छुपे हैं,
सुनाने वाला हीं जान सकता है।
सुनने वाले के लिये जो सिर्फ कहानियाँ हैं,
उनमें कितनी अौर कहानियाँ,
आँसू अौ मुस्कान छुपे हैं,
सुनाने वाला हीं जान सकता है।
समंदर हँसा रेत पर – देखो हमारी गहराई अौ लहराती लहरें,
तुम ना एक बुँद जल थाम सकते हो, ना किसी काम के हो।
रेत बोला —
यह तो तुम्हारा खारापन बोल रहा है,
वरना तुम्हारे सामने – बाहर अौर अंदर भी हम हीं हम हैं
— बस रेत हीं रेत !!!