लाल बत्ती- भूलना मुश्किल है ! – कविता Red Light- Poetry

News, The Hindu, India.FRIDAY, APRIL 21, 2017

The government has decided to do away with beacons of all kinds atop all categories of vehicles in the country as it is of the considered opinion that beacons on vehicles are perceived symbols of VIP culture, and have no place in a democratic country. They have no relevance whatsoever,” the Road Transport and Highways Ministry said in a statement later.

लाल बत्ती भी क्या चीज है ?

 किसी उच्च पुलिस पदाधिकारी की लाल बत्ती कार

 सरेआम ट्रैफिक रूल को तोड़ती  आगे बढ़ गई।

           इसे भूलना मुश्किल है!!!!!

दूसरी लाल बत्ती  ऑपरेशन थिएटर की,

किसी के ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन के दौरान 6- 8 घंटे बैठकर,

उस लाल बत्ती को  अनिश्चितता से निहारना,

उसे भी भूलना मुश्किल है!!!!

तीसरी लालबत्ती – रेड लाइट एरिया,

सच्चाई समझना हो, तो इनका दर्द महसूस   करना होगा,

इन  की  जिंदगी क्या है? जानने के बाद,

भूलना मुश्किल होगा!!!!!!

चलो एक लाल बत्ती  तो हटी।

दूसरी लाल बत्ती जीवनदायीनी है,

काश, तीसरी रेड लाइट (एरिया) के बारे में भी लोग सोचें…………

Image courtesy internet.

23 thoughts on “लाल बत्ती- भूलना मुश्किल है ! – कविता Red Light- Poetry

  1. तीसरी रेड लाइट (एरिया) के बारे में भी लोग सोचें……
    बस सोचें नही पहल भी करें और इस तरह की व्यवस्था को मुक्त करें ,

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  2. रेखा जी , आपको ये जानकर दुःख होगा कि जहाँ प्रधानमंत्री जी राष्टपति जी रहतें है दिल्ली में वहाँ से रेडलाइट एरिया की दूरी मात्र 5 किलोमीटर 15 मिनट की दूरी पर है ?
    लगभग 10 e mail प्रधानमंत्री जी को , ट्विटर पर भी कई बार बोल चुका हूं ,
    नगर निगम अधिकारी और पुलिस अवैध बसूली करती है और प्रोटेक्शन देती है उन लोगो जो इस कार्य मे लिप्त है !

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    1. आप दिल्ली में रहते है क्या ?आप जैसे सोंचा वाले लोग हो तो सुधार की उम्मीद की जा सकती है. आपकी कोशिश सराहनीय है.

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      1. यह अच्छी बात है कि आप 2014 से जागरूकता फैला रहे है.
        मैंने आपका पोस्ट पढ़ना चाहा पर खुला नही. शायद उसे join करना होगा.

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  3. आपकी जो पोस्ट है वो भी सही है लेकिन इससे भी ज्यादा दम आपकी पोस्ट के विषय मे है जो आपने लिखा है एकदम सही लिखा है,,

    ये जो तीसरी रेड लाइट है ये इतनी खतरनाक है कि एक व्यक्ति वहां से गुजर जाए तो अपनी बेइज़्ज़ती समझता है लेकिन जब बेइज़्ज़ती समाज और देश की हो तो हम अंधे कानून की तरह काली पट्टी बांध लेते है
    सही मायनो में कोई भी महिला लड़की वहां जाना नही चाहेगी लेकिन हमारे बीच से ही कुछ पुरुष इस काम मे तस्करी में है उनको शर्म नही आती ऐसे कृत्य करने में , ये सोच नही है बदलाव की ये सोच है सिर्फ पैसा कमाने की या तो इसे बदल लिया जाए या फिर सरकार गूंगी बनके ना बैठे इस पर एक प्रहार बड़ी शिददत से हो जाये
    ताकि इस कलंक से हमे मुक्ति मिल ना कि हमारी बहनों को यूं ही इसमें धकेला जाए

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    1. धन्यवाद शिवम ! आपकी बातों से बड़ी खुशी हुई. आपने सही लिखा है – इस कलंक से मुक्ति
      मिलनी चहिये.
      आप बहुत अच्छी हिन्दी लिखते है. आपके पोस्ट अच्छे लगे.

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      1. जी आभार आपका ,अभिनन्दन ये आपकी पोस्ट की वजह से लिख पाया और धन्यवाद आपका मेरी हिंदी के लिए 🙏

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