मेरा ब्लॉग -नरेटिवे ट्रांसपोटेशन या परिवहन कल्पना My Blog-Narretive Transportation


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About the name of my blog – 

     Narrative transportation theory proposes that when people lose themselves in a story  or write-up,  their attitudes and intentions change to reflect that story.

          According to Psychology this theory can be used to explain the persuasive effect of what    people read. Stories, poetry and write-ups may have a huge influence on  the readers mind .

 मेरे ब्लॉग के नाम के विषय में –

मेरे ब्लॉग का नाम नरेटिवे ट्रांसपोटेशनया परिवहन कल्पना है। यह  नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी। कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।  ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये। हमारा मन  उसमें ङूब जाये  । इस प्रभाव को   कथा परिवहन अनुभव  या  नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं।  यह एक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है। 

मैं चाहती हूँ कि मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला बढ़ाएगा।

39 thoughts on “मेरा ब्लॉग -नरेटिवे ट्रांसपोटेशन या परिवहन कल्पना My Blog-Narretive Transportation

  1. जब लेखक सिर्फ लेखक न रह कर खुद लेखन हो जाता है तब ही पाठक उसे अपने आप से जोड़ पाता है। लिखते रहिए, शुभकामनाएं।

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  2. हार्दिक शुभकामनाएं रेखा जी लेकिन हिन्दी के पृष्ठ का अंग्रेज़ी शीर्षक क्यों ? ‘कथा परिवहन’ या ‘कथ्य परिवहन’ या ऐसा ही कोई हिन्दी शीर्षक ही उचित एवं शोभनीय प्रतीत होता है । इसे मेरा निजी विचार ही समझें । निर्णय तो आप ही करेंगी और निस्संदेह सर्वोपयुक्त ही करेंगी ।

    जितेन्द्र माथुर

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    1. धन्यवाद जितेंद्र जी आपके अनमोल विचार के लिये. आपका सुझाव बिलकुल सही है. पहले मैंने हिन्दी और अंग्रेजी दोनो शीर्षक लिखे थे. पर शीर्षक काफी लम्बा लगने की वजह से हिन्दी नाम सिर्फ पोस्ट में लिख दिया है.
      क्या मुझे हिन्दी नाम पुन जोड़ देना चहिये ?

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      1. रेखा जी, जब आपकी भावाभिव्यक्ति हिन्दी में है तो अंग्रेज़ी रूप में शीर्षक की आवश्यकता ही नहीं है । हिन्दी रूप ही पर्याप्त है । आपकी हिन्दी भावाभिव्यक्तियों को पढ़ने और सराहने वालों के लिए तो ‘नरेटिव ट्रांसपोर्टेशन’ शीर्षक निरर्थक ही रहेगा । और एक लेखिका / कवयित्री के रूप में आप स्वयं को हिन्दी में ही अभिव्यक्त करना उचित समझती हैं तो आपको भी अंग्रेज़ी शीर्षक से कोई संतोष प्राप्त नहीं होगा ।

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      2. धन्यवाद जितेन्द्र जी मुझे आपका विचार अच्छा लगा . मै हिन्दी नाम ज़रूर शामिल कर दूँगी. हाँ, हिन्दी से मुझे लगाव है. इसलिये बड़े प्रयास से हिन्दी Typing सीख कर ब्लॉग शुरू किया।
        आज के वैश्विक होती दुनिया में अँग्रेजी भी ज़रूरी है. अतः मैंने अपने आप को भाषा के दायरे में बाँधना ठीक नहीं समझा। बहुत से पाठकों से भी ऐसे अनुरोध आते रहते हैं। इसलिये मैं इनमें अँग्रेजी जोड़ना ज़रूरी समझती हूँ.
        मेरे मनोविज्ञान सम्बन्धित पोस्ट मेरे कार्य (job) से जुटे होते है. जो अँग्रेजी में होना अनिवार्य है.
        आशा है आप मेरे विचार से सहमत होंगे।

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  3. Isme koi shak nahi ke ek lekhak / lekhika ya अन्य koi jo likhta hh wo atmsantushti ke lie bhi likhta hh….
    Ye to padne walo ki baat hh ke wo kya samjhte hain…
    Vishesh sabdo ko chunna bahut acchi baat hai…. Kyuki ye shabd gaghar mai sagar ka kaam kr dete hain.
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    But as a reader… Mai yahi chahunga ki ek lekhak mujhe apne lekh mai paidal safar karae… Mujhe kisi car ki jarurt nhi padegi, Jb mujhe paidal mai jyada maja aaega kyuki usme anubhav milega ek lekhak ka…

    Seedhe shabdo mai kaha jaae to…
    Jatil or vishesh shabd… Or guthee hui baate ek flow se bhtka deti hain or ek reader(sabhi nahi ) jaldbaaji mai car se nikl jata hai..
    Or agar shabd aam ho or lekh rochak ke saath udahran se bhara ho to wo vishesh shbd or guthee hui baate bhi aasani se smjha aajati hh
    Saath hi ek reader us writer ki tarah poore raste us lekh ko jee leta h…
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    Agar nadani mai kuch galat keh dia ho to apne se chota samjh kr maaf kr dijiega… 🙏

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