प्रवस पीड़ा (कविता )

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अभी प्रवस पीड़ा से
ऊबरी भी नहीँ थी.
एक ओर कमर पर हाथ धरे
जेठानी खड़ी थी.
दूसरी ओर लाल नेत्रों से
ताक रहे थे पति.
दोनो बोल पड़े – फिर बेटी ?
तुम में कोई सुधार नहीँ है.

 

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मैं एक लड़की ( कविता 2)

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मैंने आँखें खोली ,
देखा  मेरी  माँ की
आँखों मे खुशी के आँसू है.
मेरे पिता बोल रहे हैं –

इतना पूजा जतन किया
टोना -टोटका किया.
फिर दूसरी बार भी लड़की ?
बड़ी बेकार औरत हो तुम.

 

 

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मैं एक लड़की ( कविता 1 )

इस दुनिया  मॆं मैने
        आँखें खोली.
              यह दुनिया तो
                       बड़ी हसीन
                             और रंगीन है.

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मेरे लबों पर
        मुस्कान छा गई.
                 तभी मेरी माँ ने मुझे
                        पहली बार देखा.
                                वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
             तभी एक और आवाज़ आई
                          लड़की ? वो भी सांवली ?

 

 

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A new born girl ( poem )

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I opend my dark eyes
saw the big beautiful
world around me ,
for the first  time.
There was smile on ,
My pink cupid lips.
Suddenly  heard my mothers’
voice., which I was
Listening for last ,
Nine months in her womb.
She whispered – A GIRL ?
And she turned her face away.

 

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