#Iamhappy वह खुशी का पल ( blog related topic )

हम खुशियों की खोज में न जाने कहाँ-कहाँ भटकते है।बड़े-बड़े चाहतों के पीछे ना जाने कितना परेशान होते हैं। पर, सच पूछो तो खुशी हर छोटी बात में होती है। यह सृष्टि की सबसे बड़ी सच्चाई है।

इस जिंदगी के लंबे सफर में अनेक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। ये खुशियां इन उतार चढ़ाव में हमें हौसला और हिम्मत देती हैं। पर अक्सर हम छोटे-छोटी खुशियों को नज़र अंदाज़ कर देते हैं, किसी बड़ी खुशी की खोज में। ऐसा एहसास स्वामी विवेकानंद को अपने जीवन के आखरी दौर में हुआ था।

खुशी ऐसी चीज़ नहीं है जो हर समय हमारे पास रहे। यह संभव नहीं है। खुशी और दुख का मेल जीवन के साथ चलता रहता है। हाँ, खुशी की चाहत हमारे लिए प्रेरणा का काम जरूर करती है। कभी किसी के प्यार से बोले दो बोल, बच्चे की प्यारी मुस्कान, फूलों की खूबसूरती या चिड़ियों के चहचहाने से खुशी मिलती है। कभी-कभी किसी गाने को सुन कर हीं चेहरे पर मुस्कान आ जाती हैं या कभी किसी की सहायता कर खुशी मिलती है। जेनिफ़र माइकेल हेख्ट ने अपनी एक पुस्तक “दी हैपीनेस मिथ: द हिस्टीरिकल एंटिडौट टू वाट इस नॉट वर्किंग टुड़े“ में इस बात को बड़े अच्छे तरीके से बताया है।

कठिनाइयों की घड़ी में छोटे-छोटी खुशियाँ उनसे सामना करने का हौसला देती हैं। इस बारे में अपने जीवन की एक घटना मुझे याद आती है। मेरी बड़ी बेटी तब 12 वर्ष की थी। उसके सिर पर बालों के बीच चोट लग गया। जिससे उसका सर फूट गया। मैं ने देखा, वह गिरने वाली है।

घबराहट में मैंने उसे गोद में उठा लिया। जब कि इतने बड़े बच्चे को उठाना सरल नहीं था। मैंने एक तौलिये से ललाट पर बह आए खून को पोछा। पर फिर खून की धार सिर से बह कर ललाट पर आ गया। वैसे तो मैं जल्दी घबराती नहीं हूँ। पर अपने बच्चे का बहता खून किसी भी माँ के घबराने के लिए काफी होता है। इसके अलावा मेरे घबराने की एक वजह और भी थी । बालों के कारण चोट दिख नहीं रहा था। मुझे लगा कि सारे सिर में बहुत चोट लगी है।

मेरी आँखों में आँसू आ गए। आँखें आँसू से धुँधली हो गई। मैं धुँधली आँखों से चोट को ढूँढ नहीं पा रही थीं। मेरी आँखों में आँसू देख कर मेरी बेटी ने मेरी हिम्मत बढ़ाने की कोशिश की।

उसने मेरे गालों को छू कर कहा- “ मम्मी, तुम रोना मत, मैं बिलकुल ठीक हूँ’। जब मैंने उसकी ओर देखा। वह मुस्कुरा रही थी। मैं भी मुस्कुरा उठी। उसकी दर्द भरी उस मुस्कुराहट से जो ख़ुशी मुझे उस समय मिली। वह अवर्णनीय है। मुझे तसल्ली हुई कि वह ठीक है। उससे मुझे हौसला मिला। मेरा आत्मविश्वाश लौट आया। उसकी मुस्कान ने मेरे लिए टॉनिक का काम किया। मैंने अपने आँसू पोछे और घबराए बिना, सावधानी से चोट की जगह खोज कर मलहम-पट्टी किया और फिर उसे डाक्टर को दिखाया।
              

                           मुस्कुरा कर देखो तो सारा जहां हसीन है,
                    वरना भिगी पलकों से तो आईना भी धुंधला दिखता है।

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शुभ नव वर्ष– Happy New Year (हिंदी या चंद्र कैलेंडर )

आज हिन्दी कैलेंडर के मुताबिक नया साल शुरू हो रहा है। यह प्राचीन हिंदू परंपरा के आधार पर आधारित एक चंद्र कैलेंडर है। यह वर्ष / विक्रम संवत् 2072 शुरू हो रहा है। हमारे त्योहार की तिथियाँ इस पर हीं आधारित होतीं हैं।

विक्रम संवत् उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित कैलेंडर है। इसी दिन विक्रमादित्य ने उज्जैन पर आक्रमण कर शकों को भगाया था और उस दिन से इस कैलेंडर का चलन शुरू किया था। यह चंद्र महीने और सूर्य के नक्षत्रों पर आधारित है। यह चैत्र के महीने में नया चाँद के पहले दिन से शुरू होता है। यह प्रायः अंग्रेज़ी के मार्च-अप्रैल में पड़ता है। इस दिन से नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि का त्योहार भी शुरू होता है। यह नेपाल का आधिकारिक कैलेंडर है।

इस्लामी कैलेंडर या हिजरी कैलेंडर, पारसी कैलेंडर, मराठी नव वर्ष – गुड़ी पड़वा, कश्मीरी नया साल- नवरस, पंजाब का वैशाखी, ईसाई परंपरा या अँग्रेजी कैलेंडर आदि अनेकों कैलेंडर है।

तिथि की गणना के लिए बनाए गए कैलेंडरों में कुछ की गणना सूर्य के उगने और डूबने से होता है, जैसे- अँग्रेजी कैलेंडर। ठीक इसी प्रकार अन्य कैलेंडरों में चंद्रमा के निकलने और अस्त होने से दिन की गिनती होती है। जैसे विक्रम संवत या हिन्दी कैलेंडर पूर्णिमा या अमावस्या से दिनों की गिनती करते है।

अच्छा है हमारे पास नया वर्ष मनाने के अवसर अनेकों बार आते है। पर इन सबों में सर्वाधिक प्रचलित नव वर्ष है- एक जनवरी या अँग्रेजी कैलेंडर। पर क्या यह अच्छा नहीं है कि हम अपने-अपने नव वर्ष को भी उत्साह और जोश से मनाएँ?