
जब हमने प्राकृतिक से जी भर कर छेड़छाड़ की है. अब प्रकृतिक की बारी है . वैसे भी सभी को अपनी नाराज़गी दिखाने का हक़ है. इसलिए अब मौसम पैंतरे बदल रहा है. हम सबों को झेलना तो पड़ेगा हीं.

जब हमने प्राकृतिक से जी भर कर छेड़छाड़ की है. अब प्रकृतिक की बारी है . वैसे भी सभी को अपनी नाराज़गी दिखाने का हक़ है. इसलिए अब मौसम पैंतरे बदल रहा है. हम सबों को झेलना तो पड़ेगा हीं.