ऐसा भी देश है, ऐसे भी लोग हैं।
वरना मातृत्व तो महिलाओं की हीं
ज़िम्मेदारी समझी जाती है।
और वह भी अक्सर घर में रहकर.
सलाम है इन्हें!!!

ऐसा भी देश है, ऐसे भी लोग हैं।
वरना मातृत्व तो महिलाओं की हीं
ज़िम्मेदारी समझी जाती है।
और वह भी अक्सर घर में रहकर.
सलाम है इन्हें!!!
