जिंदगी में हर रिश्ते एक दूसरे से
मुकाबला,आज़माइशें या
बराबरी करने के लिये नहीं होते हैं।
कुछ रिश्ते एक- दूसरे के हौसले इज़ाफ़ा करने अौर
कमियों को पूरा करने के लिये भी होते हैं।।
तभी ये रिश्तों को दरख्तों के जड़ों की तरह थामे रखते हैं।
जिंदगी में हर रिश्ते एक दूसरे से
मुकाबला,आज़माइशें या
बराबरी करने के लिये नहीं होते हैं।
कुछ रिश्ते एक- दूसरे के हौसले इज़ाफ़ा करने अौर
कमियों को पूरा करने के लिये भी होते हैं।।
तभी ये रिश्तों को दरख्तों के जड़ों की तरह थामे रखते हैं।
थका हरा सूरज रोज़ ढल जाता है.
अगले दिन हौसले से फिर रौशन सवेरा ले कर आता है.
कभी बादलो में घिर जाता है.
फिर वही उजाला ले कर वापस आता है.
ज़िंदगी भी ऐसी हीं है.
बस वही सबक़ सीख लेना है.
पीड़ा में डूब, ढल कर, दर्द के बादल से निकल कर जीना है.
यही जीवन का मूल मंत्र है.

हौसले जीत से नहीं बढ़ते .
परेशानियों से डरे बिना ,
उन को हराने से बढ़ते हैं .
ज़िंदगी में हमें दूसरों को हराने की नहीं
अपने आप से जीतने से आदत होनी चाहिये.

यह कविता किसी अपने के लिये जो दिल के बहुत करीब है।
Image courtesy – Monica

ढेर सारी मीठी मीठी हँसी
छलक छलक कर बिखर गई।
बरसाती, उफनती नदी सी बह कर सभी को
अपने साथ गीली करती भिगो गई।
कांटों भरी, संघर्ष शिखर लगते हालातों में
हौसले , ताकत, सबक दे जाती हैं
बच्चों की यह मासूमियत ।
इसलिये बचपना बचाये रखना !!!!!
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