ढेरों बातें और यादें बटोरे
गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे
इंतज़ार में, राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..
उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना
सारे ल़फ्ज ….अल्फाज़ चुरा ले गया।
ढेरों बातें और यादें बटोरे
गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे
इंतज़ार में, राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..
उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना
सारे ल़फ्ज ….अल्फाज़ चुरा ले गया।
दिल से निकले
शब्द, लफ्ज़, बातें वो जादू कर सकते हैं,
जो शायद विधाता रचित
सुंदरतम चेहरा नहीं कर सकता।

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