ज़िंदगी के रंग – 191

हमसे ना उम्मीद रखो सहारे की.

ख़ुद हीं लड़ रहे हैं नाउम्मीदी से.

वायदा है जिस दिन निकल आए,

पार कर लिया दरिया-ए-नाउम्मीद को.

सबसे बड़े मददगार बनेंगे.

 

चुम्बक magnet

 

पल पल बदलता यह मन

ना जाने क्या ढूँढता रहता है .

शायद यह खींचता  है कुछ

अौर ख़ुद खींच जाता  है किसी ओर।

चुम्बक की तरह लगता है ….