मोक्षदा एकादशी / गीता जयंती ३.१२.२२ Gita Mahotsav 3.12.2022

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।

(जीवन में आने वाली विपरीत परिस्थितियों में हौसला दिलानेवाला श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक)

भगवान श्रीकृष्ण ने संसार को गीता के ज्ञान रूप में अपनी विशेष कृपा प्रदान की है। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को गीता जयंती मनाई जाती है.

Gita Mahotsav is an event centred around the  Bhagavad Gita, celebrated on the Shukla  Ekadashi, the 11th day of Margashirsha the  waxing moon of the  (Agrahayan) month of the Hindu calendar. It is believed the Bhagavad Gita was revealed to Arjunaby Krishna in the battlefield of Kurukshetra.

सागर और ब्रह्मांड का फ़लसफ़ा

चाँद ने सूरज को आवाज़ दे कर कहा –

ज़िंदगी की राहों में कुछ पाना,

कुछ खोना लगा रहता है।

कम ज़्यादा होना लगा रहता है।

भला या बुरा किया किसी के साथ,

उसका जवाब मिलता रहता है।

आवाज़ की गूंजें लौट कर है आती रहतीं हैं।

सागर और ब्रह्मांड का यह है फ़लसफ़ा।

बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी

कुछ लोग बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी।

वे भूल जातें है, ख़ुद एक आईना है ज़िंदगी।

और जब अचानक उन्हें हीं उनका चेहरा

दिखाती है आईना-ई-ज़िंदगी।

तब नहीं पाते अपने आप को पहचान,

या अपना भूला चेहरा ना चाहतें हैं पहचानना?

धूमिल, दाग़दार, मलिन अक्स।

आईना नहीं बोलता झूठ, जानते हैं सभी शख़्स

क्यों हर रास्ता

क्यों हर रास्ते चलते जातें हैं,

ज़िन्दगी की बहाव की तरह?

क्यों रास्तों के पेच-ओ-ख़म,

राहों की सख़्तियाँ ख़त्म होतीं नहीं है,

ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव की तरह?

मालूम नहीं हर रहगुज़र मंज़िल का पता दे कि ना दे,

पर राहों पर चलते जाना हीं सफ़र-ए-ज़िंदगी है।

हम सब हैं मुसाफ़िर, मंज़िल की तलाश में।

मैं ख़ुद आईना

आईने ने पूछा –

क्यों लिए फिरती हो मुझे साथ?

मैंने कहा –

यक़ीं है, कड़वे लोगों को बेहतरीन

ज़वाब दे ऊपरवाला थामे रहेगा मेरा हाथ।

पर भूल से भी अहंकार में ना डूब जाऊँ,

आईने में खुद को देख नज़रें झुकाऊँ,

इस कोशिश में कि मैं ख़ुद आईना बन जाऊँ।

अपने से अपनी होड़ लगाऊँ।

Interesting fact –
Stay true to yourself. As what brings

you a sense of happiness, purpose

and meaning in life is important.

मौन माफ़ी

मौन रह कर

माफ़ कर देना,

मौन रह कर

जीवन पथ पर बढ़ जाना

सबके बस की बात नहीं।

यह होता है तब

ऊपरवाले पर भरोसा हो जब।

अलफ़ाज़ बेमानी हो जाते हैं तब।

इश्क़ और पानी पात्र

छुआ-छूत और जात की बात,

हमबिस्तर की रात नहीं रहती याद।

ब्लड की बोतल हो जाती है पाक।

आर्गन डोनेशन लेने में

नहीं रहती कोई बात।

बस विवाह, इश्क़ और पानी पात्र में

आड़े आती है जात।

News- Tank Cleaned With Cow Urine

In Karnataka After Dalit Woman

Drinks Water. There are several tanks

in the village with written messages that

everyone can drink water from there.

https://www.ndtv.com/india-news/tank-cleaned-with-cow-urine-in-karnataka-after-dalit-woman-drinks-water-3539191/amp/1

सूखते गुलाबों में

सूखते गुलाबों में भी अक्सर

जानी पहचानी ख़ुशबू मिलती है।

पुरानी किताबों में भी अक्सर

अजीब से ख़ुशबू मिलती है।

पुरानी किताबों में मिले सूखे गुलाब,

की मिलाजुली ख़ुशबू

ले जाती हैं यादों के भँवर में।

बीते दिनों के समुंदर में।

#TopicByYourQuote

फिर याद आए वो

फिर याद आए वो,

तो ग़मगीन हो जाते हो।

चाह कर भी भूल ना पाए

तो ग़मगीन हो जाते हो।

कभी दुआओं में किसी को माँगते हो।
कभी उसे हीं भूलने की दुआएँ माँगतें हो।

झाँसी की रानी – लक्ष्मी बाई

चमक उठी सन् सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी।

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।

ख़ूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

सुभद्राकुमारी चौहान

Lakshmi Bai / Laxmi Bai, birth date

November 19, 1835, Kashi, India.