आत्मघाती बम बनते बच्चे
बच्चे खूबसूरत फूलों की तरह होते हैं , और जिंदगी का सबसे खुबसूरत लम्हा बचपन होता हैं.
दरिँदगी की हद पार करते आतंकियों ने इन्हें भी नहीँ बख्शा हैं. आतंकी बच्चों का इस्तेमाल आत्मघाती हमलों में बम के रुप में करने लगे हैं. दुखद बात हैं , ऐसे बम बनाने में बालिकाओं का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता हैं. लगभग एक वर्ष मॆं बोको हरम द्वारा इस कृत्य मॆं लगभग 11 गुना अधिक बालिकाओं को लगाया गया हैं.
दिल दहलाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2016 के बीच चालीस से अधिक बच्चों को आत्मघाती बम के रुप मॆं जान गंवानी पड़ी हैं. यह संख्या तेज़ी से बढ़ती जा रही हैं.
बच्चों को इस कुकृत्य मॆं लगाने से रोका जाना चहिये.
Image by Chandni Sahay.
शनि शिंगणा – तराशा हुआ काला हीरा ( कविता )
चार सौ वर्षों से,
दुनिया की आधी आबादी ,
दूर से पूजती रही ,
काले हीरे से शनि देव को
आज़ किसी ने सोंचा ,
और सम्मान दिया नारी को ,
क्या मातृवत नारी का स्पर्श
सर्व शक्तिमान देव को दूषित कर सकता था ?
( शनि शिंगणा मंदिर , महाराष्ट्र मॆं देव मूर्ति के पास महिलाओं का जाना और पूजा अर्चना निषेध था. मुम्बई हाईकोर्ट ने इस निषेध को हटाते हुये महिलाओं को पूजा अर्चना की इजाजत दे दी हैं , जो प्रशंसनीय हैं. )
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वृंदावन की वृध्द विधवाये ( कविता )
वृंदावन और कान्हा की मुरली
सब जानते हैं
वृंदावन की होली
सब जानते हैं
पर वहाँ कृष्ण को याद करती
सफेदी में लिपटी विधवाओ की टोली
किसने देखी हैं ?
आज़ जब पहली बार
उन्हों ने खेली फूलों की होली
सफेदी सज गई गुलाबो की लाली से
कहीँ बज उठी कान्हा की मुरली
उनकी उदास सांसो से.
( मान्यता हैं कि वृंदावन , वाराणसी आदि में शरीर त्यागने से मोक्ष के प्राप्त होती हैं. इसलिये प्रायः इन स्थानों पर विधवाये आ कर सात्विक जीवन बसर करती हैं. यहाँ इन्हें अनेकों बंधनों के बीच जीवन व्यतीत करना पड़ता हैं. इस वर्ष पहली बार होली खेलने के लिये कुछ मंदिरों ने अपने द्वार इन विधवाओं के लिये खोल दिये. )
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अस्पताल ( कविता )
नाम से ही दिल
डूबने लगता है
ना जाने आगे
क्या होगा ?
सोंच कर
घबराहट होती है.
पर ,
आधुनिक विज्ञान के चमत्कार
को सलाम , जो डूबती
कश्ती को भी
किनारे लगा देती हैं.
(मुझे अपने पति के ब्रेन ट्यूमर ओप्रेशन का वीडियो देखने का अवसर मिला. मैं आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और चिकित्सक की योग्यता देख कर अभिभूत हो गई.)
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अग्निपरीक्षा (कविता )

देवी सिया अग्निपरीक्षा से
निकली
तपे स्वर्ण
की तरह
पर , इस अग्निपरीक्षा
का क्या कोई ठोस
परिणाम मिला ?
हाँ , राम ने वनवास दिया.
आज़ भी कहीँ -कहीँ
वधु -ज्वलन की
वहीं
अग्निपरीक्षा परम्परा
जारी हैं.
बस आज़ की सीता
कितनी भी पावन हो ,
अग्निपरीक्षा में ही
अनुतिर्ण हो जाती हैं.
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राम की पंचवटी ( हरियाली का संदेश देती कविता )
सरयू तट पर पंचवटी
राम ने रोपा
राम की प्रिय उद्यान स्थली
अपने हाथों से पंच देवों
को वृक्ष रुप में किया स्थापित
मध्य में शिव रूपी बरगद
चतुष कोनो पर
गुलर गणेश ,
विष्णु रूपी पीपल
बेल में निवासित सूर्य
और
देवी का निवास स्थान आम्र वॄक्ष
क्या राम भी जानते थे
दुनिया में हरियाली का मोल ?
हम पूजते हैं उन्हे पर
भूल जाते हैं उनके संदेश.
( हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद के पेड़ मॆं भगवान शिव , पीपल मॆं विष्णु , बेल मॆं सूर्य, आम मॆं देवी भगवती और गुलर वृक्ष मॆं गणेश जी निवास करते हैं. इस कारण अक्सर लोग इन वृक्षों को काटना उचित नहीँ समझते हैं. इन्हें देवी -देवता का रुप मानने के पीछे प्रकृति की सुरक्षा का गहरा अर्थ छुपा हैं )
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नागवेणी (कहानी )
डूबते सूरज की लाल किरणो से निकलती आभा चारो ओर बिखरी थी. सामने, ताल का रंग लाल हो गया था. मैं अपनी मोबाईल से तस्वीर लेने लगी. डूबते सूर्य किरणों के साथ सेल्फी लेने की असफल कोशिश कर रही थी. पर तस्वीर ठीक से नहीं आ रही थी. तभी पीछे से आवाज़ आई – ” क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूँ ? “चौक कर पलटी तो सामने एक खुबसूरत , कनक छडी सी, आयत नयनो वाली श्यामल युवती खड़ी थी.
मैंने हैरानी से अपरिचिता को देखा और पूछा – “आप को यहाँ पहले नहीं देखा. कहाँ से आई है?और मोबाईल उसकी ओर बढ़ा दिया . उसने तस्वीरें खींचते हुये कहा – कहते हैं , डूबते सूरज के साथ तस्वीरें नही लेनी चाहिये. मैं भी अस्ताचल सूर्य के साथ अपनी तस्वीर लिया करती थी. फ़िर गहरी नज़रों से उसने मुझे देखते हुये मेरे मन की बात कही – बडे कलात्मक लगते है न ऐसे फोटो? मैंने हामी में सिर हिलाया.
फ़िर मुस्कुराते हुए दूर गुजरती हुए राजमार्ग की ओर इशारा करते हुए कहा -” मैं वहाँ रहती हूँ. मैं तो आपको रोज़ देखती हूँ. आप सुबह मेरे आगे ही तो योग अभ्यास करती है. मेरा नाम नागवेणी है , पर यह नाम आप पर ज्यादा जंचेगा . आपकी नाग सी लम्बी , मोटी , बल खाती चोटी मुझे बड़ी आकर्षक लगती है. अब उसकी बातों का सिलसिला ख़त्म ही नहीं हो रहा था मान ना मान मैं तेरी मेहमान वाली उसकी अदा से मैं बेजार होने लगी थी. योग निद्रा कक्षा में जाने का समय होते देख मैंने उस से विदा लिया.
अगली शाम मैं हरेभरे वृक्षों के बीच बनी राह से गुजरते हुये अपने पसंदीदा स्थल पर पहुँची. पानी के झरने की मधुर कलकल और अस्तगामी सूर्य के लाल गोले के सम्मोहन में डूबी थी. तभी , मधुर खनकती आवाज़ ने मेरा ध्यान भंग कर दिया. नागवेणी बिल्ली की तरह दबे पैर , ना जाने कब मेरे बगल में आकर खड़ी हो गई थी.
उसकी लच्छेदार गप्पों का सिलसिला फ़िर से शुरू हो गया. अचानक उसने पूछा -आप यहाँ कब से आई हुई हैं ?”आप चित्रकारी भी करती हैं ना ? आपकी लम्बी , पतली अंगुलियों को देख कर ही मैं समझ गई थी कि यह किसी कलाकार की कलात्मक अंगुलियाँ हैं . डूबते सूर्य की पेंटिंग बनाईये ना”. उसने मेरे बचपन के शौक चित्रकारी की बात छेड़ कर गप्प में मुझे शामिल कर लिया . मैंने कहा -” हाँ , चित्रकारी कभी मेरा प्रिय शगल था. अब तो यह शौक छूट गया है.
उसकी बात का जवाब देते हुये मैंने मुस्कुराते हुये कहा -“तीन दिनों पहले इस नेचर क्योर इन्स्टिट्यूट में आई हूँ अभी एक सप्ताह और रहना है. यहाँ चित्रकारी का सामान ले कर नहीँ आई हूँ “.मेरी मुस्कुराहट के जवाब में मुस्कुराते हुये उस ने अपने पीठ की ओर मुडे दाहिने हाथ को सामने कर दिया. मैंने अचरज से देखा. उसने लम्बी ,पतली, नाजुक उँगलियों में चित्रकारी के सामान थाम रखे थे. मैंने झिझकते हुये कहा – ” मैं तुम्हारा सामान नहीं ले सकती”.
“हद करती हैं आप , मुझसे दोस्ती तो कर ली , अब इस मामूली से सामान से इनकार क्यों कर रही हैं? देखिये , मेरे दाहिने हाथ में चोट लगी हैं. इसलिये मैं भी चित्र नहीं बना पा रहीं हूँ”. दूर गुजरते नेशनल हाईवे की ओर इशारा करती हुये बोली – “एक महीने पहले , 14 जनवरी को ठीक वहीं , सड़क पार करते समय दुर्घटना में मुझे चोट लग गई थी. अभी आप ही इसे काम में लाइये.
मैंने उसे समझाने की कोशिश की – ” देखो नागवेणी, ना जाने क्यों , अब पहले के तरह चित्र बना ही नहीँ पाती हूँ. एक -दो बार मैंने कुछ बनाने की कोशिश भी की थी. पर आड़ी -तिरछी लकीरों में उलझ कर रह गई .”आप शांत मन से चित्र बना कर तो देखिये. फ़िर देखियेगा अपनी कला का जादू. अपने आप ही आप की उँगलियाँ खुबसूरत चित्रकारी करने लगेंगी” नागवेणी ने रहस्यमयी आवाज़ में कहा और बच्चों की तरह खिलखिला कर हँसने लगी. मैं भी उसकी शरारत पर हँसने लगी.
मैंने अपनी और नागवेणी की ढेरों सेल्फी ली और वहीं एक चट्टान पर बैठ कर तस्वीरें उकेरने लगी. तभी किसी ने मेरे पीठ पर हाथ रखा. मुझे लगा नागवेणी हैं. पलट कर देखा. मेरे पड़ोस के कमरे की तेज़ी खड़ी थी. उसने पूछा – “आप अकेले यहाँ क्या कर रहीं हैं ? फ़िर मेरे हाथों मॆं पकड़े चित्रों को देख प्रसंशा कर उठी. सचमुच बड़े सुंदर चित्र बने थे. नागवेणी ने ठीक ही कहा था. शायद यह मेरे शांत मन का ही कमाल था. पर नागवेणी चुपचाप चली क्यों गई ? मैने तेज़ी से पूछा – “तुमने नागवेणी को देखा क्या “? तेज़ी ने बताया कि वह नागवेणी को नहीं पहचानती हैं.
अगले दो दिनों में मैंने ढेरों खुबसूरत चित्र बना लिये थे. यह सचमुच जादू ही तो था. इतने सुंदर और कलात्मक चित्र मैंने आज़ से पहले नहीं बनाये थे. मुझे नागवेणी को चित्र दिखाने की बड़ी चाहत हो रही थी. पर उस से मुलाकात ही नहीं हो रहीं थी. इतनी बडे , इस प्रकृतिक चिकित्सालय में सब इतने व्यस्त होते हैं कि मिलने का समय निकालना मुश्किल हो जाता हैं. मैने बहुतों से नागवेणी के बारे में पूछा पर कोई उसके बारे में बता नहीं पाया. बात भी ठीक हैं, इतने सारे लोगो के भीड़ में सब को पहचानना मुश्किल हैं.
रात मॆं टहलने के समय दूर नागवेणी नज़र आई .मैंने उसे पुकारा. पर वह रुकी नही. मै दौड़ कर उसके पास पहुँची और धाराप्रवाह अपनी खुबसूरत चित्रकारी के बारे में बताने लगी. मैने हँस कर कहा -” तुमने तो जादू कर दिया हैं नागवेणी. दो दिन कहाँ व्यस्त हो गई थी “.नागवेणी ने मेरे बातों का जवाब नही देते हुये कहा – मैं भी बहुत सुंदर चित्र बनाती थी. मैने अपनी कला तुम्हे उपहार में दे दी हैं. तुम मेरे साथ दोस्ती निभाओगी ना ? तुम मुझे बड़ी अच्छी लगती हो.
उसकी बहकी बहकी बातें सुन मैंने नजरे उसके चेहरे पर डाली. उसने उदास नजरो से मुझे देखा और कहा – ” अब तो तुम वापस जाने वाली हो पर मैं तुमसे मिलने आती रहुँगी.
पत्तों पर किसी के कदमों की चरमराहट सुन मैंने पीछे देखा. तेजी मुझे आवाज़ दे रही थे. मैने नागवेणी की कलाई थाम कर कहा -“चलो , तुम्हे तेज़ी से परिचय करा दूँ. फरवरी महीने के गुलाबी जाडे में नागवेणी की कोमल कलाई हिम शीतल थी. मैंने घूम कर तेज़ी को आवाज़ दिया. तभी लगा मेरी हथेलियों से कुछ फिसल सा गया.
तेज़ी ने पास आते हुये पूछा – ” इतनी रात में आप अकेले यहाँ क्या कर रही हैं ? मैने पलट कर देखा. नागवेणी का कहीँ पता नहीँ था. मुझे उस पर बड़ी झुंझलाहट होने लगी बड़ी अजीब लड़की हैं. कहाँ चली गई इतनी जल्दी ?
उस दिन मैं लाईब्रेरी मॆं बैठी चित्र बना रही थी. तेजी अपने मोबाईल से तस्वीरें लेने लगी. जाने से पहले सभी एक दूसरे के फोटो और फोन नम्बर लेना चहते थे. तभी टेबल के नीचे रखे पुरानेअख़बार की एक तस्वीर जानी पहचानी लगी . मैंने उसे हाथों मॆं उठाया और मेरी अंगुलियाँ काँप उठी . ठंढ के मौसम मॆं ललाट पर पसीने की बूँदें झलक उठीं. मैंने अख़बार की तिथि पर नज़रें डाली.
लगभग एक महीने पुरानी , जनवरी के अख़बार मॆं एक अनजान युवती के शव को शिनाख्त करने की अपील छपी थी. जिसकी मृत्यु 14 जनवरी को राज़ मार्ग पर किसी वाहन से हुए दुर्घटना से हुई थी. यह तस्वीर नागवेणी की थी. मैंने अपनी पसीने से भरी कांपती हथेलियों से मोबाईल निकाली. अपनी और नागवेणी की तस्वीरों को देखने लगी. पर हर तस्वीर मॆं मैं अकेली थी.
मेरे कानों मॆं नागवेणी की आवाज़ गूँजने लगी – मैं भी बहुत सुंदर चित्र बनाती थी. मैने अपनी कला तुम्हे उपहार में दे दी हैं. तुम मेरे साथ दोस्ती निभाओगी ना ?मैं तुमसे मिलने आती रहुँगी.
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राम गीता
राम के निर्देशानुसार दुखित लक्ष्मण सीता को वन में छोड़ कर लौटे. तब राम ने उन्हे समझाया और दार्शनिक उपदेश दिया. जिसे राम गीता के नाम से जाना गया.

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Healthy Hair 1 (beauty tip ) easy, tried n tested home remedy
1. Henna leaves
2. China rose flower/ hibiscus- 5-10
3. aloe vera
4. Basil/ tulsi leaf
5. Neem leaf
6. fenugreek seeds 1table spoon
7. Eclipta Alba /Bhringraj
( other Popular Names- Babri, Galagara, Gunta-kalagara, Kaikeshi, Karisha-langanni, Karisirang-kanni, Kesharaji, Kesuri, Kesuria, Kesutti, Maka, Mochkand)
Parts Used: Herb, roots, leaves, stem.
8. Brahmi /Bacopa Monnieri leaves.
(some Common Name : Brahmi, bacopa, Babies tear, Bacopa monnieri, Herpestis monniera, water hyssop)
Parts Used : Whole Plant.
Grind everything finely. Apply on scalp and hair properly . Keep it for 1-2 hours.
Important –
1.Avoid in winter, as effect of henna is cold.
2. For best effect use fresh leaves.
3. Generally, these things are available at ayurvedi shops in dried form.
4. may add 2 eggs .
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