
Einstein’s Brain





पलक झपकते कभी कभी
कितना कुछ बदल जाता है .
कभी मन आँखों के रास्ते
बरस जाता है.
कभी आसमान के आँसू
बरसात बन बरस जाते है.
इन्हें पन्ने पर उतारने की कोशिश …..
शब्दों में बाँधने की हर कोशिश
बहा ले जाती है ये बरसाती बूँदे……

समंदर ने पैरों के पास
अपने झागो के साथ
कुछ सीपियाँ ऐसे
ला कर
छोड़ गया ,
जैसे कुछ लौटा रहा है.
ज़िंदगी भी अक्सर बड़ी मासूमियत से
बहुत कुछ अचानक लौटा देती है.
ठीक ही कहते है ,
जो दो वह लौट कर ज़रूर आता है .


ना करना चाहो तो हजार बहाने है ……
करने वाले कर जातें है बिना कुछ कहे -सुने.

ऐ उम्र !
कुछ कहा मैंने,
पर शायद तूने सुना नहीँ..!
तू छीन सकती है बचपन मेरा,
पर बचपना नहीं..!!
हर बात का कोई जवाब नही होता…,
हर इश्क का नाम खराब नही होता…!
यूं तो झूम लेते है नशे में पीनेवाले….,मगर हर नशे का नाम शराब नही होता…!
खामोश चेहरे पर हजारों पहरे होते है….!
हंसती आखों में भी जख्म गहरे होते है….!
जिनसे अक्सर रुठ जाते है हम,*
असल में उनसे ही रिश्ते गहरे होते है….!
किसी ने खुदा से दुआ मांगी.!
दुआ में अपनी मौत मांगी,
खुदा ने कहा, मौत तो तुझे दे दु मगर…!
उसे क्या कहु जिसने तेरी जिंदगी मांगी…!
हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता….!
हर एक इन्सान बुरा नही होता.
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….!
हर बारकुसुर हवा का नही होता.. !!

–गुलजार

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