A mystical land

A mystical land where 99% off human productivities,  motivations and achievements are stored.

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ज़िंदगी के रंग

नीचे एक सरल चित्र है, लेकिन बहुत ही गहरे अर्थ के साथ।

आदमी को पता नहीं है कि नीचे सांप है और महिला को नहीं पता है कि आदमी भी किसी पत्थर से दबा हुआ है।

महिला सोचती है: “मैं गिरने वाली हूँ! और मैं नहीं चढ़ सकती क्योंकि साँप मुझे काटने वाला है।”

आदमी थोड़ा अधिक ताक़त का उपयोग करके मुझे ऊपर क्यों नहीं खींच सकता है! ”

आदमी सोचता है: “मैं बहुत दर्द में हूँ! फिर भी मैं अभी भी आपको उतना ही खींच रहा हूँ जितना मैं कर सकते हूँ!सामने वाला खुद कोशिश क्यों नहीं करता और थोड़ा कठिन चढ़ाई को पार कर लेता?”

नैतिकता: आप उस दबाव को देख नहीं सकते जो सामने वाला झेल रहा है, और ठीक उसी तरह सामने वाला भी उस दर्द को नहीं देख सकता जिसमें आप हैं।

यह जीवन है, भले ही यह काम, परिवार, भावनाओं, दोस्तों, परिवार के साथ हो, आपको एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी चाहिए, अलग-अलग सोचना, एक-दूसरे के बारे में सोचना और बेहतर तालमेल बिठाना चाहिए।

हर कोई अपने जीवन में अपनी लड़ाई लड़ रहा है और सबके अपने अपने दुख हैं इसीलिए कम से कम हम जब सभी अपनों से मिलते हैं तब एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने के बजाय एक दूसरे को प्यार, स्नेह और साथ रहने की खुशी का एहसास दें, जीवन की इस यात्रा को लड़ने की बजाय प्यार और भरोसे से आसानी से पार किया जा सकता है।

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जिन्दगी के रंग- 134

You have to keep breaking your heart until it opens – Rumi ❤

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हमने पूछा नहीं तुमसे, ए जिंदगी !

कितने …..अभी और कितने इम्तिहान लोगी?

बस देते गए, देते हीं गए।

रास्ते बदलते रहे, परीक्षाएं बदलती रही।

तुम देखना क्या चाहती हो ? टूटे या नहीं टूटे ?

तुमसे कभी पूछा नहीं……….

अभी और कितने पङाव बाकी है,

कितनी परीक्षाएँ बाकी है ?

 

Image courtesy – Chandni Sahay.

Sleeping beauty syndrome

Woman with ‘sleeping beauty syndrome’ misses annual exams after sleeping for 3 weeks straight

 

 

ज़िंदगी के रंग -133

सम्भालते संभालते ,

संभलते-सम्भलते ,

लगता है जैसे …….

हवा का झोंका आया और

फिर सब बिखर गया .

सूखी मृत पत्तियों की तरह .

चिड़ियों कें घोंसलों पर रोक

अजीब सी रोक

पंछियों के चहचहाने से गुलजार था सारा माहौल तभी आवाज आई – अपने घरों से तो तुमने हमें निकाल दिया है। अब बेदखल कर रहे हो पेङों से। हम जाएं तो जाएं कहां ? तुम तो बंधे हो बंधन में -देश, सीमा, धर्म, रंग….. हमें तो आजाद रहने दो। अभी पिछले वर्ष तुमने पक्षी या वर्ड्स वर्ष मनाया। अब हमें निकाल रहे हो हमारे घरों से? भूल गये क्या प्रकृति के संतुलन में भी हम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

In UK Why are nets appearing over trees and hedges?

I matter

The reality is,

I matter ……

you matter…..

we matter…..

If we are with

genuine people.

वृद्ध अंगारक या बुढवा मंगल

यह होली के बाद के पहले मंगलवार को मनाया जाता. इस दिन सभी बड़े बुज़ुर्गों को सम्मान देते हुए , उनके चरणों में अबीर लगा नमन कर आशीर्वाद लिया जाता है . इस दिन बहुत से आयोजन जैसे – महामूर्ख सम्मेलन , संगीत व नृत्य आदि होते हैं. यह सप्ताह होली सप्ताह की ख़ुमारी से भरा होता है .

थोङी सहानुभूती अौर प्यार


अपने टूटे शरीर और दिलो- दिमाग के साथ

जबरदस्ती ना करो

वह वही कहता है जो उसे चाहिए –

थोङा समय,

थोङा आराम,

थोङी सहानुभूती अौर प्यार बस …….

Happiness

Happiness will never

come to those ,

who fail to appreciate

what they already have.

Buddha 🌈