क्या कोई बता सकता है?
सागर का पानी हर जगह क्या एक सा खारा है ?
क्या समय और मौसम बदलने पर भी
खारापन एक सा रहता है ?
कुछ समझ नहीं आया तो पूछा सागर से हीं।
बिना जवाब दिये बस नाचता रहा
लहरों के साथ इतरा कर।

क्या कोई बता सकता है?
सागर का पानी हर जगह क्या एक सा खारा है ?
क्या समय और मौसम बदलने पर भी
खारापन एक सा रहता है ?
कुछ समझ नहीं आया तो पूछा सागर से हीं।
बिना जवाब दिये बस नाचता रहा
लहरों के साथ इतरा कर।

क्या आज हम एक दूसरे पर
भरोसा करना भूल गए है ?
या हम सबको साथ ले कर चलना भूल गए है ?
या इंसान की फ़ितरत हीं ऐसी होती है ???!

Image courtesy- Chandni Sahay.
ना जाने किन-किन बातों पे रोना आया,
इतना तो याद है …..
हँसने की कोशिश पे रोना आया।
किनारे पहुच कर अपने
को डूबते देख, रोना आया।

खोखले शब्दों में बुने मायाजाल की माया
और खोखलापन ज्यादा दिन नहीं टिकते।

I have been a seeker and I still am,
but I stopped asking the books and the stars.
I started listening to the teaching of my Soul.

व्यंग Satire

चुनाव का मौसम आते राजनीति
गलियरों में एक खेल ज़ोरों पर है।
एक दूसरे पर ताने कसते, व्यंग,
टीका–टिप्पणी करते…..
धर्म, पार्टी, राजनीतिक आधार पर
तंज कसते, छिंटाकशी करते बड़े लोगों का खेल.
जो बच्चों जैसे लग रहे हैं.
जनता भी बिना सोचे समझे
इस खेल को खेलने लगी है.
अब इंतज़ार यह है कि ये लोग कब बड़े होंगे .
तब तो हम,
तय करेगे कि– हम वोट किसे दें !!!!

जो अपने आप को प्यार करते हैं ,
वह दूसरों को चोट नहीं पहुंचा सकतें।

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