राह के पत्थर

राह के पत्थरों के ठोकरों ने सिखाया,

राह-ए-ज़िंदगी पर चलना।

बुतों का इबादत किया हर दम।

फिर क्यों  फेंक दें इन पाषणों को? ,

सबक तो इन्हों ने  भी दिये कई  बार।

 

 

Stay happy, healthy and safe-179

Many of life’s failures are people who did not realize how close they were to success when they gave up.

Thomas A. Edison

Stay happy, healthy and safe – 178

In a conflict between the heart and the brain, follow your heart.

Swami Vivekananda

Stay happy, healthy and safe- 177

If you want to live a happy life, tie it to a goal, not to people or things.

Albert Einstein

Stay Happy, Healthy and Safe – 176

The life of inner peace,

being harmonious and without stress,

is the easiest type of existence.

 

 

—Norman Vincent Peale

क्या हाल है?

क्यों,  किसी के  ‘क्या हाल है?’  पूछते

 दर्दे-ए-दिल का हर टांका उधड़ता चला जाता है?

कपड़े के थान सा दिल का हर दर्द,

तह दर तह, अनजाने खुलता चला जाता है।

 यह  सोचे बिना,  इसे समेटेगा कौन?

ख़ता किसकी है?

पूछने वाले के अपनेपन की?

 या पीड़ा भरे दिल की?

 

Image- Aneesh

Stay Happy, Healthy and Safe – 175

Laughter is the tonic,

the relief,

the surcease for pain.

 

Charlie Chaplin

Stay Happy, Healthy and Safe – 174

Life is a tragedy

when seen in close-up,

but a comedy in long-shot.

 

Charlie Chaplin

Stay Happy, Healthy and Safe – 173

We are stars wrapped in skin-

the light you are seeking

has always been within.

 

❤  -Rumi

हिन्दी दिवस (हिन्दी सप्ताह ) Hindi Divas

 

“हिन्दी दिवस” – 14 सितंबर के शुभ अवसर पर सभी   को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

Happy  Hindi Divas (Day) ! It is  celebrated on 14 September

यह गर्व की बात हैं कि  हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है. इसकी विशेषताएं हैं –

1. जो लिखते हैं ,वही पढ़ते हैं और वही बोलते हैं.

2.  उच्चारण सही हो, तब सुन कर लिख सकते हैं.

3. वाक्य सम्बोधन  बड़े या छोटे के लिये अलग अलग होते हैं. जैसे आप ,तुम.

4. वाक्य शुरू करनेवाले  विशेष अक्षर ( capital ) नहीँ     होते.

  वैज्ञानिक कारण –

 अक्षरों का वर्गीकरण, बोली  और उच्चारण के अनुसार हैं. “क” वर्ग  कंठव्य कहे जाता हैं , क्योंकि इसका कंठ या गले से हम उच्चारण करते हैं.बोलने के समय जीभ गले के ऊपरी भाग को छूता हैं. बोल कर इसे  समझा जा सकता हैं.

क, ख, ग, घ, ङ.

इसी तरह “च ” वर्ग के सब अक्षर तालव्य कहलाते हैं.इन्हें बोलने के  समय जीभ तालू  को छूती है ।

च, छ, ज, झ,ञ

    “ट”  वर्ग मूर्धन्य कहलाते हैं. इनके  उच्चारण के समय जीभ  मूर्धा से लगती  है ।

ट, ठ, ड, ढ ,ण

“त ” समूह के अक्षर दंतीय कहे जाते हैं. इन्हें बोलने के  समय जीभ दांतों को छूता हैं.

त, थ, द, ध, न

“प ” वर्ग ओष्ठ्य कहे गए, इनके  उच्चारण में दोनों ओठ आपस में मिलते  है।

प , फ , ब ,भ , म.

इसी तरह दंत ” स “, तालव्य  “श ” और मूर्धन्य “ष” भी बोले और लिखे जाते हैं.