
एक नौजवान लेखक के कलम में ऐसी
क्या ताक़त थी कि कुछ लोगों
में इतना डर भर गया ?
क्यों कहते हैं कलम आज़ाद होती है .
यह दुर्घटना है या लिखने की सज़ा?
The spirit of our times!!

एक नौजवान लेखक के कलम में ऐसी
क्या ताक़त थी कि कुछ लोगों
में इतना डर भर गया ?
क्यों कहते हैं कलम आज़ाद होती है .
यह दुर्घटना है या लिखने की सज़ा?


बर्बरता और क्रूरता की इंतिहा हो गई .
किसी की आँखों का मोल नहीं है
किसी के जीवन का मूल्य नहीं .
मासूमियत भी नज़र नहीं आई .
है अनमोल सिर्फ़ अपनी दुश्मनी, 5 हज़ार
रुपये और अपनी हैवानियत !!!

पृथ्वी को हमने डस्टबीन बना दिया ,
दिल नहीं भरा है तब सागर की ओर मुड़ गए .
फिर भी तसल्ली नहीं हुई तो
एवरेस्ट का भी यह हाल कर दिया .
हद है स्वार्थ परस्ता और नासमझी की.
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