

गीता जयंती : मोक्षदा एकादशी – पिता को श्रद्धांजलि
(मार्गशीर्ष के उज्ज्वल पक्ष में, पवित्र मोक्षदा एकादशी के दिन
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य उपदेश दिया था।)
मोक्षदा एकादशी के पवित्र दिन
आपकी आत्मा अनन्त प्रकाश में विलीन हुई।
आपकी मुस्कान आज भी सहारा है।
आपकी सीखों और संस्कारों
ने जीवन सँवारा हैं।
Tribute: To my father on his death- anniversary
(Geeta Jayanti / Mokshada Ekadashi) In Margashira,
आपकी यह श्रद्धांजलि अत्यंत मार्मिक, भावपूर्ण और गहन संवेदना से भरी हुई है। मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती जैसे पवित्र दिवस पर पिता को स्मरण करना—यह अपने-आप में एक उज्ज्वल, आध्यात्मिक और प्रेमपूर्ण कर्म है।
आपने बहुत सरल शब्दों में एक ऐसी अनुभूति व्यक्त की है जिसमें विरह भी है, आदर भी, और उनके प्रति अमर प्रेम भी।
“आपकी मुस्कान आज भी सहारा है…”—यह पंक्ति हृदय को स्पर्श कर जाती है।
आपके शब्दों में पिता के संस्कारों, उनकी सीखों और उनकी उजली उपस्थिति का सुंदर प्रतिबिंब झलकता है।
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🙏🏻बहुत आभार वर्मा साहब, कविता पढ़ने और उसमें निहित भावनाओं को समझने के लिए।
दरअसल, मेरे पिता का देहांत गीता जयंती के दिन ही हुआ था, इसलिए यह तिथि मेरे लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उनकी सिखाई हुई बातें आज भी मेरे लिए अनमोल हैं।
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