रौशनी की चाह में ……
वक़्त को रोकने की कोशिश में ……
सूरज की सुनहरी बिखरी रोशनी को
दुपट्टा की गाँठ में बाँधा.
दिन ढले गाँठें खोली ,
पर सुनहरी नहीं ,
चाँद की रूपहली रौशनी ……
चाँदनी बिखर गई हर ओर
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है .

रौशनी की चाह में ……
वक़्त को रोकने की कोशिश में ……
सूरज की सुनहरी बिखरी रोशनी को
दुपट्टा की गाँठ में बाँधा.
दिन ढले गाँठें खोली ,
पर सुनहरी नहीं ,
चाँद की रूपहली रौशनी ……
चाँदनी बिखर गई हर ओर
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है .

On the path of Love
we are neither
masters nor the
owners of our lives.
We are only a
brush in the hand
of the Master Painter.
