फिर उसी मोड़ पर

अपने को खो कर

अनचाहे किसी की चाहत में

खुद को ढ़ाल दिया.

पर उसके जाने के बाद ……

अजनबी बन हम

फिर उसी मोड़ पर खड़े हैं,

जहाँ से चले थे .

अब वापस अपने को पाने की चाह …..

कोशिश……पूरी होगी कभी क्या ?

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