एक टुकड़ा ज़िंदगी का !!

विचारों, यादों के क़ैद में टुकडे टुकड़े ज़िंदगी क्या जीना ?

मन , विचार ज़िंदगी से बड़े कैसे हो सकते हैं?

ज़िंदगी है इसलिए मन है, विचार और यादें हैं.

Positive vision

In order to carry

a positive action

we must develop

here a positive vision.

— Dalai Lama

मेसोफ़ोनिया – कृपया शोर ना करें !!

मिसोफ़ोनिया कुछ ध्वनियों के प्रति संवेदनशील होने को कहते है। यह बुद्धिमान होने का संकेत है।

Rate this:

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि मिसोफ़ोनिया वाले लोगों ज्यादा शोर, आवाज या विशिष्ट ध्वनियों को नापसंद करते हैं। जिन्हें “ट्रिगर ध्वनियां” कहते है। ऐसे लोगों को पानी टपकने, चबाने की आवाज, तड़कने , शोर या पेंसिल टैपिंग जैसी आवाज़ों से प्रतिक्रिया हो सकती है।
जब वे ट्रिगर की आवाज़ सुनते हैं, तो ये लोग चिड़चिड़े या क्रोधित हो जाते हैं। इन आवाजों से उनका ध्यान भटकता है।

Courtesy- Wikipedia