ख़त

एक ज़माना था

जब किताब लेना देना

और लौटाना तो बहाना था .

ख़ुशबू में डूबे ख़तों

का यह राह पुराना था .

पर उन पैग़ामों का क्या ……

खोजने वाले पन्ने पलटे रहे

बातें अनकहे लबों और

झुकी नज़रों में छुपी रह गई .

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