एक ज़माना था
जब किताब लेना देना
और लौटाना तो बहाना था .
ख़ुशबू में डूबे ख़तों
का यह राह पुराना था .
पर उन पैग़ामों का क्या ……
खोजने वाले पन्ने पलटे रहे
बातें अनकहे लबों और
झुकी नज़रों में छुपी रह गई .

एक ज़माना था
जब किताब लेना देना
और लौटाना तो बहाना था .
ख़ुशबू में डूबे ख़तों
का यह राह पुराना था .
पर उन पैग़ामों का क्या ……
खोजने वाले पन्ने पलटे रहे
बातें अनकहे लबों और
झुकी नज़रों में छुपी रह गई .

Bahut badhiya Rekha Ji
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Shukriya Abhay.
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Very Nice.. 🙂
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Thank you 😊
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👌👌
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Thank you ☺️
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welcome always 😊
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kaahani har ❤️ ki
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😊😊
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😊
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Beautiful!
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Thank you 😊Drishti.
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