जिंदगी के रंग – 20

कङवी या मीठी-मृदु,

सबकी जिंदगी है एक कहानी।

कुछ हँसाती, कुछ रुलाती,

                                                                                    रसीली या निरस

जहाँ

अपनों को अपना बनाये रखने की कोशिश में

पराये  तो अपने हो जाते हैं,

पर कुछ अपने अौर कुछ सपने हीं खो जाते हैं।

48 thoughts on “जिंदगी के रंग – 20

  1. अपनों को अपना बनाये रखने की कोशिश में

    पराये  तो अपने हो जाते हैं,

    पर कुछ अपने अौर कुछ सपने हीं खो जाते हैं।

    Ye pankti emotional kr gyi

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  2. Sach mai rekhaji .aapne bahut khub likha.
    Apno ko aapna bnaye rkhane ki koshish mai praye to aapne ho jane hai,
    Pr kuch apne ur kuch sapne hi kho jate hai.👌👌👌

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  3. अपनों को अपना बनाये रखने की कोशिश में

    पराये तो अपने हो जाते हैं,

    पर कुछ अपने अौर कुछ सपने हीं खो जाते हैं।
    KYAA BAAT…..BAHUT HI KHUBSURATI SE LIKHAA HAI…..

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  4. पर यह भी सत्य है रेखा दी और पाखी कुछ अपने और सपने कभी साथ नहीं छोड़ा करते हैं।

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      1. सत्य हैं दी पर हमें विश्वास है इस बार राधा और कृष्ण जी साथ होंगे।

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      2. धन्यवाद दी। हम भी यही प्रार्थना करते हैं की ईश्वर आपकी हर इच्छा पूरी करें।

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