बेलगाम   ख्वाहिशें-  कविता 

कुछ ख्वाहिशें बेलगाम उडती,

 बिखरती रहती है हवा के झोंकों सी.

 सभी अरमानों को पूरा करना मुशकिल है,

और  बंधनों में बाँधना भी मुश्किल है.

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