मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #1

 

मैंने जागते के साथ बंद आँखों से अपने मोबाइल फोन की ओर हाथ बढ़ाया. हाथों में चुभन हुई. मेरी आँखें अपने आप खुल गई. आश्चर्य से देखा. मेरा मोबाइल गुस्से भरी लाल आँखों से मुझे देख रहा हैं. उसके शरीर पर काटें और सिर पर दो सींग उग आये हैं. उसके हाथों में एक बोर्ड हैं. जिस पर लिखा हैं -आज मेरा छुट्टी दिवस है.

उसने मुझे बड़ी बेरुखी से देखा और पूछा – मेरा रविवार कब हैं ? मुझे भी सप्ताह में एक दिन की छुट्टी चहिये.फिर वह अपने आप ही बुदबुदाने लगा -ना रात देखते , ना दिन. बस काम , काम और काम. मेरी ओर देख कर जोर से बोला -काम की अधिकता से मुझे बर्न आऊट सिंड्रोम हो गया हैं और उसकी सारी बत्तियां बुझ गई.

बिना मोबाईल मुझे दुनियाँ अंधकारमय लगने लगा. माथे पर पसीने की बूँदें छलक गई. अब क्या होगा ? सारी बातें तो इसी मोबाईल रूपी काले डब्बे में बंद हैं. मैं मोबाईल उठा पागलों की तरह चुभन के बाद भी बटन दबाने लगा और चिल्लाने लगा -तुम ऐसा नहीँ कर सकते हो.

तभी किसी ने कहा -नींद में इतना शोर क्यों मचा रहे हो ? मैं भयानक सपने से जाग गया. ख़याल आया बात तो सही हैं. एक दिन फोन को , और हमें फोन से एक दिन की छुट्टी ले कर देखनी चाहिये.

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29 thoughts on “मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #1

    1. मुझे लगा Serious post ज्यादा लिख रहीं हूँ इसलिये कुछ हँसने हँसाने की बात की जाये. 😊😊

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      1. Haan jrur
        अधूरा ज्ञान इंसान को प्रयोग में नहीं लाना चाहिए वो खतरनाक होता है
        ठीक उसी प्रकार मुझे भी अधूरी कहानिया अच्छी नहीं लगतीं

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      2. Ok. आज मैं दूसरा part पोस्ट करूँगी.

        In psychology, the Zeigarnik effect states that people remember uncompleted or interrupted tasks better than completed tasks.

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