कोलकाता की यादें २- कस्तुरी रेस्टोरेन्ट (यात्रा अनुभव )

 
कोलकाता जा कर मुझे वहाँ की बंगाली तरीके से बनी मछ्ली खाने की बड़ी इक्छा थी। हमारे एक परिचित ने कस्तुरी रेस्टोरेन्ट का पता बताया। यह न्यू मार्केट में फ्री स्कूल स्ट्रीट में है।
सीढ़ियों से ऊपर पहुँच कर लंबा सा हाल नज़र आया। वहाँ का रख-रखाव भी मामूली था। बड़ा साधारण सा दिखनेवाले रेस्टोरेन्ट देख दुविधा होने लगी। कहीं हमने यहाँ आ कर गलती तो नहीं किया। हमने मेनू देखना चाहा। वहाँ का मेनू बड़ा नायाब था। दो ट्रे में ढेर सारे मछली के बने व्यंजन कटोरों में सजे थे। जो व्यंजन पसंद हो उन कटोरों को उठा लेना था।
उस रेस्टोरेन्ट में सिर्फ मछली के व्यंजन मिलते है। चिंगड़ी, रेहू, भेटकी, कतला, पोमफ्रेट, हिलसा / इलिस मछली के अलावा कई और मछलियों के व्यंजन भी उपलब्ध थे। साथ में सादा चावल था। सभी व्यंजन स्वाद के लिहाज़ से दूसरे से भिन्न थे। मैंने पहली बार मछली किसी साग या सब्जी के साथ बना देखा था। भोजन का स्वाद लाजवाब था। टमाटर की मीठी चटनी और सेवई भी स्वादिष्ट थी।
रेस्टोरेन्ट देख कर हुई दुविधा व्यर्थ निकला। वहाँ भोजन कर बंगाल के स्वादिष्ट भोजन का भरपूर लुत्फ़ मिला। तब खयाल आया – “रूप से ज्यादा गुण मायने रखता है।“ कस्तुरी वास्तव में कस्तुरी खुशबू की तरह सुवासित थी- “भोजन के सुगंध से।“

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