

जब हम एक साथ पढ़ते थे.
ना जाने क्या क्या शरारत करते थे .
लड़ते थे झगड़ते थे.
पर पल में भूल नाचते-गाते, पढ़ते- लिखते,
शाररत भरे गुल खिलाते थे.
अपने प्रिय टीचरों के बदले आए अनजान
टीचरों का चेहरा देख हमारे चेहरे उतर जाते थे.
दिमाग़ में शैतानियाँ भरे बादल घिर आते थे .
नय टीचरों को छकाते और सताते थे.
और परीक्षा आते भगवान याद आते थे .
जब हम सब साथ थे कभी नहीं सोचा
इन मित्रों से मिलने में इतने साल निकल जाएँगे.
जीवन की इतनी यात्राओं के बीच
ना जाने दुनिया में क्या-क्या बदल गया .
ज़िंदगी ने कितने रंग दिखाये.
कभी चले थे यहाँ से ज़िंदगी की राह पर.
आज वापस इस पड़ाव पर,
पीछे मुड़ कर देखने पर
वह जीवन किसी सिनेमा सा दिखता है.
पर तसल्ली है …….खुशी है…..
बिना क़समें खाए , बिना कुंडली मिलाए भी
तुम सब आज ज़िन्दगी में वापस आ गए .
सबका वापस मिलना बड़ा सुकून भरा है .
dedicated to all friends.
सभी मित्रों को समर्पित



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