
सब कुछ सँवारते-खुशबू बँटते रहने वालों को बिखरते देखा है।
पर कांटों के बीच फूलों का भी तो यही हश्र होते देखा है।

सब कुछ सँवारते-खुशबू बँटते रहने वालों को बिखरते देखा है।
पर कांटों के बीच फूलों का भी तो यही हश्र होते देखा है।
किसी की तकलीफ कम ना कर सको कोई बात नहीँ.
पर दर्द और तकलीफ बढ़ाओ भी नहीँ ,
तब भी बड़ी दुआ मिल जायेगी.
एक प्यारी सी मुस्कान ही जिंदगी जीने का
हौसला दे जायेगी.

If you want to hold beautiful one
Hold yourself to yourself.
इक उम्र बीत गई जिंदगी जीते हुए .
पर उलझने आज भी उलझाती है .
या तो हमें जिंदगी जीना नहीँ आया .
या जिंदगी ने ठीक से सबक नहीँ सिखाया.
या रोज़ नये नये सबक ले कर
नये रंग दिखाती है जिंदगी …..

मृत, कटु अतीत , यादों का बोझ
स्मृतियों की निष्ठुरता
अक्सर बङी भारी होती है।
इनके वज़न तले दबे रहने से
अच्छा है, इस घुटन से निकल
इन्द्रधनुष के सात रंगों में जीवन जीना।
If you read my last post (My First Blog) you’ll know that being positive can be really hard sometimes. Its so easy to get carried away with dwelling on the negative things that happen in our lives, especially when we have our really down days. For instance, It might be hard to sit and think about how that nice man held the door open for you this morning, when you got made redundant that afternoon; It might be equally as difficult to look at being made redundant, and focus on the exciting new beginnings and opportunities that may enter our lives now, rather than the newly present worry of money. It might also be the situation that your life is absolutely fine, everything is going amazingly, but for some reason, you just can’t seem to see the positives in life, you constantly feel down and you look for the negatives as a…
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The calm trees
The sleeping grass
The chirping birds
The musical winds
The magnetic paths
The dancing river
The eyes can’t get better
View than this.
The mind can’t get nothing
More peaceful than this.
The soul can’t get more
Freedom than this.
The brain can’t meditate
Better than this.
~Jyoti Yadav
You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.
Swami Vivekananda
जीवन की परिपूर्णता —-
अगर यह लौकिक हो – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,
या संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।
तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।
क्या खोजता है यह ?
क्या खींचती है इसे अपनी अोर?
यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?
शायद अपने आप को ढूँढ़ने
मैं कौन हूँ??
…
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Venue & date – 27.5.2017, G5A, Shakti Mill, Mahalakshmi, Mumbai
The eminent poets – Kala Ramesh, Bina Sarkar Ellias, Anju Makhija , Rahman Abbas, Vinita Agrawal, Rochelle Potkar, Smita Sahay, Gayatri Chawla, Neha Mishra Jha, Ramneek Singh, Tripurari Kumar Sharma, Smeetha Bhoumik.
Discussion on – Veils, Halos & Shackles’ – An International book on women empowerment, Editor- Charles Fishman and Smita Sahay.
एक सुहानी ढलती शाम, मुम्बई का खुला आसमान,
अपने घरों को लौटते परिंदे,
पास के पीपल के घोंसलों में चहचहाते पक्षी।
बोगनवेलिया के खुबसूरत झूमते फूलों पर उतर आई ,
आसमान में ङूबते सुरज की लाली।
ऐसे में हिंदी, उर्दू अौर अंग्रेजी
के गंगा-जमुनी कवियों अौर कविताअों का संगम।
क्या यह नजारा दिल को सुकून पहुचाने के लिये कुछ कम है?
एक सुहानी शाम कविता अौर कवियों के नाम…….
मेरे जीवन में कुछ रहस्यमय घटनाएँ हुई हैं। जिन्हे याद कर मै रोमांचित हो जाती हूँ। यह वास्तविक घटना सन 1991 की है। तब हम घाटशिला नाम के छोटे से शहर में रहते थे । एक बार हम सभी कार से राँची से घाटशिला लौट रहे थे। यह दूरी लगभग 170 किलोमीटर थी। यह दूरी समान्यतः चार घंटे में हम अक्सर तय करते थे।
शाम का समय था। सूरज लाल गोले जैसा पश्चिम में डूबने की तैयारी में था। मौसम बड़ा सुहाना था। यात्रा बड़ी अच्छी चल रही थी। मेरे पति कार चला रहे थे। साथ ही गाना गुनगुना रहे थे। मेरी आठ वर्ष की बड़ी बेटी व एक वर्ष की छोटी बेटी कार के पीछे की सीट पर आपस में खेलने में मसगुल थीं।
तभी एक तेज़ आवाज़ ने हम सभी को भयभीत कर दिया। कार तेज़ी से आगे बाईं ओर झुकती हुई सड़क पर घिसटने लगी। मेरे पति ने किसी तरह कार को रोका। कार से बाहर आकर हमने देखा कि आगे का बायाँ चक्का अपनी जगह से पूरी तरह बाहर निकाल आया है। कार एक्सल के सहारे घिसती हुई रुक गई थी। कार का चक्का पीछे सड़क के किनारे पड़ा था। हम हैरान थे कि ऐसा कैसे हुआ? हाईवे पर हम एक भयंकर दुर्घटना से हम बाल-बाल बच गए थे।
एक बड़ा हादसा तो टल गया था। पर हम चिंतित थे। शाम ढाल रही थी। शहर से दूर इस सुनसान जगह पर कार कैसे बनेगी? सड़क के दूसरी ओर मिट्टी की छोटी सी झोपड़ी नज़र आई। जिसमें चाय की दुकान थी। मेरे पति उधर बढ़ गए। मैं कार के पास खड़ी थी। तभी मेरी नज़र कार के पीछे कुछ दूर पर गिरे एक नट पर पड़ी। मैंने उसे उठा लिया। किसी अनजान प्रेरणा से प्रेरित मैं काफी आगे तक बढ़ती गई। मुझे और भी नट व बोल्ट मिलते गए और मैं उन्हे उठा कर अपने साड़ी के पल्लू में जमा करते गई। जबकि मैं यह भी नहीं जानती थी कि वे किसी काम के हैं या नहीं।
मैं जब वापस लौटी तब मेरे पति मेरे लिए परेशान दिखे। तब तक हमारी कार के पास कुछ ग्रामीण इकट्ठे हो गए थे। उनमें से एक चपल सा दिखने वाल साँवला, कद्दावर व्यक्ति मदद करने आगे आया। उसके चपटे, बड़े से चेहरे पर चोट के निशान थे और छोटी-छोटी आँखों में जुगनू जैसी चमक थी। मेरे पास के नट व बोल्ट देख कर वह उत्साहित हो गया। उसने कहा- “दीदी जी, आपने तो सारे नट-बोल्ट जमा कर लिए हैं। लाईये मैं आपकी कार बना देता हूँ। मुझे यह काम आता है।” तुरंत उसने कुछ ग्रामीणों को पास के गाँव से कुछ औज़ार लाने भेजा। उसके “दीदी” संबोधन और ग्रामीणो पर प्रभाव देख कर हमें तस्सली हुई। चलो, अब कार बन जाएगी।
मेरे पति ने मुझे और बच्चों को चाय की दुकान पर बैठा कर चाय दिलवाई और स्वयं कार ठीक करवाने लगे। चाय वाला मुझसे बार-बार कुछ कहने की कोशिश कर रहा था। चाय वाले ने फुसफुसाते हुए मुझ से कहा- ” आप यहाँ मत रुकिए। अब रात भी हो रही है। आप के साथ बच्चे भी हैं। तुरंत यहाँ से चले जाइए। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह ऐसी बातें क्यों कर रहा है। चाय वाले ने फिर मुझसे कहा- ” वह व्यक्ति बड़ा खतरनाक है जो आपलोगों की सहायता कर रहा है। यहाँ पर होनेवाले ज़्यादातर अपराधों में यह शामिल होता है। हाल में हुए हत्या का आरोपी है। आप यहाँ मत रुकिए। थोड़ी देर में मेरी दुकान भी बंद हो जाएगी। यह तो बड़ा दुष्ट व्यक्ति है। पता नहीं, कैसे आपकी मदद कर रहा है। यहाँ सभी उससे बड़ा डरते है।” वह लगातार एक ही बात तोते की तरह रट रहा था -“आप बच्चों को ले कर जाइए। मत रुकिए।” चाय दुकान में बैठे अन्य लोगों ने भी सहमति में सिर हिलाया अौर बताया कि वह व्यक्ति वहाँ का कुख्यात अपराधी है।
मै घबरा गई। मुझे याद आया कि मेरे काफी गहने भी साथ है क्योंकि, मैं एक विवाह में शामिल होने राँची गई थी। मैंने अपने पति को सारी बात बताने की कोशिश की। पर वह अनजान व्यक्ति लगातार अपने पति के साथ बना रहा। वह मुझे अकेले में बात करने का अवसर नहीं दे रहा था। मुझे परेशान देख , उस अजनबी ने मुझे समझाते हुए कहा- “दीदी, आप घबराइए मत। हम हैं ना। भय की बात नहीं है। हमारे रहते यहाँ आपको कोई परेशान नहीं कर सकता। वह हमें रोकने का जितना प्रयास कर रहा था। मन में उतना ही डर बढ़ता जा रहा था। उसकी मीठी-मीठी बातों के पीछे षड्यंत्र नज़र आ रहा था।
मैंने किसी तरह अवसर निकाल कर अपने पति को सब बातें बताईं। पर वहाँ से जाने का कोई साधन नहीं था। अब क्या करूँ। कुछ समझ नहीं आ रहा था। अँधेरा घिरना शुरू हो चुका था। तभी राँची जाने वाली एक बस आती नज़र आई। ग्रामीणों ने बताया कि बस यहाँ नहीं रुकती है। घबराहटवश, मैं बीच सड़क पर खड़ी हो गई। बस को रोकने के लिए हाथ हिलाने लगी। बस रुक गई। बस वाले ने मेरी परेशानी और बच्चों को देख कर हमें बैठा लिया। वह अजनबी लगभग गिड्गिड़ाने लगा। “दीदी जी, मैं जल्दी ही कार बना दूँगा। आप मत जाइए।” वह मेरे पति का हाथ पकड़ कर अनुरोध करने लगा।
कुछ सोचते हुए मेरे पति ने मुझे दोनों बेटियों के साथ बस में बैठा दिया और मेरे जेवरों का सूटकेस भी साथ दे दिया। वे स्वयं वहाँ रुक गए। मेरा दिल आशंकाओं से भर गया। पर उन्हों ने आश्वासन देते हुए मुझे भेज दिया।राँची पहुँच कर अपने घर में मैंने सारी बातें बताई। उन्होंने तत्काल कारखाने (कार सर्विसिंग ) में फोन किया। दरअसल उस दिन सुबह ही हमारी कार वहाँ से धुल कर आई थी। पता चला कार सर्विसिंग वालों के भूल से यह दुर्घटना हुई थी। कार के चक्कों के नट-बोल्ट उन्होंने लगाया गया था। पर औज़ार से कसा नहीं था। कार सर्विसिंग के मालिक ने अपनी गलती मानी। तुरंत ही कार सर्विसिंग वालों ने एक कार और कुछ मेकैनिकों को हमारे यहाँ भेजा। जिससे वे मेरे पति और मेरी खराब कार को सुधार कर वापस ला सकें।
कार सर्विसिंग कें लोग मुझ से कार खराब होने की जगह समझ ही रहे थे। तभी मैंने देखा मेरे पति अपनी कार ले कर आ पहुंचे हैं। मै हैरान थी। उन्हों ने बताया कि बड़ी मेहनत से उस व्यक्ति ने कार ठीक किया। कार के रिम को सड़क से ऊपर उठाने और चक्के को सही जगह पर लगाने में उसे बड़ी कठिनाई हुई थी। पर वह लगातार मेरे अकेले लौटने का अफसोस कर रहा था।मैं इस घटना और उस अजनबी को आज भी भूल नहीं पाती हूँ। कौन था वह अजनबी? वह मुझे दीदी-दीदी बुलाता रहा। पर घबराहट और जल्दीबाजी में मैंने अपने अनाम भाई का नाम तक नहीं पूछा । पता नहीं उससे क्या रिश्ता था ? जो उसने बिना माँगे मदद के लिये हाथ बढाया। क्या ऐसे अजनबी को भुलाया जा सकता है? मैं आज भी इस घटना को याद कर सोंच में पड़ जाती हूँ । क्यों कभी एक अपराधी भी मददगार बन जाता है? उस दिन मैंने मान लिया कि बुरे से बुरे इंसान में एक अच्छा दिल होता है।
ऐसे में मेरी नज़रें ऊपर उठ जाती है और हाथ नमन की मुद्रा में जुड़ जाते हैं। जरूर कोई अदृश्य शक्ति हमारी रक्षा करती है। हम उसे चाहे जिस नाम से याद करें- ईश्वर, अल्लाह, क्राइस्ट ………..
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(guest post, on the request of a fellow blogger )
From day one, the countdown of nine months begun;
And I eagerly waited for month five, for flaunting my baby bump.
Silently, I wished an early arrival of my Delivery day;
Guess that’s why I kept maternity bag ready, weeks before the estimated date.
Yes, I felt restless; but slow deep breaths lowered my stress.
Yes, I was in fear; when my Due Date was getting near.
Then one fine day, I realized you were trying to come out;
And hence I gave a loud shout!
I kept my eyes closed, not in pain but in mirth;
I closed my eyes to thank god for helping me throughout your birth.
Though it was your first day on earth, but it wasn’t our first meet;
As you were inside me from past forty weeks.
You caught everyone’s attention,
The time I brought you Home with indefinable satisfaction.
Honestly, I used to get a happy-unhappy feeling,
As your hairs were growing,
But my hair growth was slowing.
From reading books and articles on baby grooming to baby clothing;
I sought and bought everything, made for your well-being.
After some time, you started using your cries to alarm me;
Dear Baby, you certainly turned me into a busy bee.
With you, I realized that Baby Care is beyond breastfeeding;
That phase is still special to me since ’twas my level one of parenting.
Sapana is mother of 2 who is been writing about pregnancy, breastfeeding and baby health on her blog from last 2+ years. She is a work from home mother juggling between work and kids. The most she enjoys is suggesting Cute baby names.guest
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