ज़िंदगी बुनती रहती है सपने
धागे के ताने-बाने से,
रेशम सी बनाती ।
तभी,जब सुहानी बयार
रुख बदल आँधी बन जाती है.
रेशम के ताने बाने तार-तार कर जाती है।
यादें हलकी हो भी जायें।
दर्द कहाँ कम होता है?
ज़िंदगी बुनती रहती है सपने
धागे के ताने-बाने से,
रेशम सी बनाती ।
तभी,जब सुहानी बयार
रुख बदल आँधी बन जाती है.
रेशम के ताने बाने तार-तार कर जाती है।
यादें हलकी हो भी जायें।
दर्द कहाँ कम होता है?