चूहों का स्ट्राइक – व्यंग

पहलें बिहार, अब उत्तर प्रदेश के नाराज़

चूहे स्ट्राइक पर हैं, कहते है –

कुतरना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है

अपने लगातार बढ़ते दाँतों को तराशने के लिए।

पर बोतलें और शराब ? ना बाबा ना ……

हमारे ऊपर भी ढेरों जिन्मेदारियाँ हैं।

गणपति वाहन , करनी माता भक्त , ढेरों वैज्ञानिक शोध …….

अभी तक लगभग तीस नोबेल विजेताओं के काम

व दुनिया की  ख़ूबसूरती  प्रोडक्टस

हमारे बलिदान पर टिके हैं.

महाभारत में पांडवों को बचाने के लिए विदुर

ने हमारे टेक्नोलाजी का उदाहरण दिया था।

सच तो यह है कि पीते-पिलाते ख़ुद हो और नाम कमज़ोर का ?

कभी नशे में देखा है क्या हमें?

तुम्हें तो हमारे बिलों और हमारे नालियों के हाई-वे

के आस पास कई बार गिरे , नशे में चूर देखा है ।

हमारे नाम बदनाम ना करो,  वरना ……

पाईड पाइपर की ज़रूरत बस पड़ जाएगी तुम्हें,

अपने घर की नीवों को हमसे बचाने के लिए।

English news- Rats drank it’: Cops as 1,000 litres of seized liquor disappears from police station

https://m.hindustantimes.com/india-news/rats-drank-it-cops-as-1-000-litres-of-seized-liquor-disappears-from-police-station/story-29vyjzzRCsYj2RjAP0gBdO.html

Inshorts.

Ghalib’s Glory

क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं.
मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ

The prison of life and the bondage of grief are one and the same.
Before the onset of death, how can man expect to be free of grief?


क़ैद-ए-हयात – जीवन की क़ैद

बंद-ए-ग़म – ग़मों की क़ैद

अस्ल-असल

Rules of love – Rule 32


Nothing should stand between you and God.

No imams, priests, rabbits or any other custodians of moral or religious leadership.

Not spiritual masters and not even your faith. Believe in your values and your rules, but never lord them over others.

If you keep breaking other people’s hearts, whatever religious duty you perform is no good. Stay away from all sorts of idolatry, for they will blur your vision.

Let God and only God be your guide. Learn the Truth, my friend, but be careful not to make a fetish out of your truths.

Shams Tabriz spiritual instructor of Rumi ❤️❤️

ज़िन्दगी के रंग -107

A 1946 love story: After 72 years of separation, 90-year-old man meets first wife-  An eight-month love story. After Narayanan Nambiar and Sarada were split in 1946, their children from second marriages decided to set up a meeting for the two.

English News – https://www.thenewsminute.com/article/1946-love-story-after-72-years-separation-90-year-old-man-meets-first-wife-94069

मेरी एक पुरानी सच्ची कहानी इसी खबर की तरह अजीब सी विङंबना पर आधारित है। जिसे यहाँ दे रहीं हूँ।

वह हमारे घर के पीछे रहती थी। वहाँ पर कुछ कच्ची झोपङियाँ थीं। वह वहीं रहती थी। कुछ घरों में काम करती थी। दूध भी बेचती थी। लंबी ,पतली, श्यामल रंग, तीखे नयन नक्श अौर थोङी उम्र दराज़। उसका चेहरा सौंदर्यपुर्ण, सलोना अौर नमकीन  था। उसकी बस्ती में जरुर उसे सब रुपवती मानते होंगे।
जब भी मैं उधर से गुजरती । वह मीठी सी मुस्कान बिखेरती मिल जाती। उसकी मुस्कान में कुछ खास बात थी। मोनालिसा की तरह कुछ रहस्यमयी , उदास, दर्द भरी हलकी सी हँसी हमेशा उसके होठों पर खेलती रहती। एक बार उसे खिलखिला कर हँसते देखा तब लगा मोनालिसा की मुस्कान मेरे लेखक मन की कल्पना है।
एक दिन उसकी झोपङी के सामने से गुजर रही थी। वह बाहर हीं खङी थी। मुझे देखते हँस पङी अौर मजाक से बोल पङी – मेरे घर आ रही हो क्या? मैं उसका मन रखने के लिये उसके झोपङी के द्वार पर खङे-खङे उससे बातें करने लगी। उसका घर बेहद साफ-सुथरा, आईने की तरह चमक रहा था। मिट्टी की झोपङी इतनी साफ अौर व्यवस्थित देख मैं हैरान थी। यह कहानी झाखण्ङ की है। यहाँ के आदिवासियों का रहन-सहन वास्तव में बङा साफ-सुथरा होता है। झोपङी के बाहर भी कलात्मक चित्र गोबर अौर मिट्टी से बने होतें हैं।

एक दिन, सुबह के समय वह अचानक अपने पति के साथ मेरे घर पहुँच गई। दोनों के चेहरे पर चिन्ता की लकीरें थीं। पति के अधपके बाल बिखरे थे। उसके कपङे मैले-कुचैले थे। शायद उम्र में उससे कुछ ज्यादा हीं बङा था। पर वह बिलकुल साफ-सुथरी थी। तेल लगे काले बाल सलिके से बंधे थे। बहुत रोकने पर भी दोनों कुर्सी पर ना बैठ,  सामने ज़मीन पर बैठ गये।

पता चला, उनका बैंक पासबुक उसके पति से कहीं खो गया था। वह बङी परेशान सी मुझ से पूछ बैठी -“ अब क्या होगा? पैसे मिलेंगे या नहीं ?” दोनों भयभीत थे। उन्हें लग रहा था, अब बैंक से पैसे नहीं मिलेगें। वह पति से नाराज़ थी। उसकी अोर इंगित कर बोलने लगी – “देखो ना, बूढे ने ना जाने “बेंक का किताब” कहाँ गिरा दिया है।” जब उसे समझ आया, पैसे अौर पासबुक दोनों बैंक जा कर बात करने से मिल जायेंगें, तब उसके चेहरे पर वही पुरानी , चिरपरिचित मोनालिसा सी मुस्कान खेलने लगी।
एक दिन मैं उसके घर के सामने से गुजर रही थी। पर उसका कहीं पता नहीं था। मेरे मन में ख्याल आया, शायद काम पर गई होगी। तभी वह सामने एक पेंङ के नीचे दिखी। उसने नज़रें ऊपर आसमान की अोर थीं, जैसे ऊपरवाले से बातें कर रही हौ। उसकी हमेशा हँसती आँखोँ में आँसू भरे थे। मैं ने हङबङा कर पूछा – “ क्या हुआ? रो क्यों रही हो?” तब उसने अपने जिंदगी की विचित्र कहानी सुनाई।
***

बेहद कम उम्र में उसका बाल विवाह किसी छोटे अौर पिछङे गाँव में  हुआ था। कम वयस में दो बच्चे भी हो गये। वह पति अौर परिवार के साथ सुखी थी। उसके रुप, गुण अौर व्यवहार की हर जगह चर्चा अौर प्रशंसा होती थी। उसे जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी।

एक दिन उसका महुआ अौर ताङी का प्रेमी (शराबी) पति उसे जल्दी-जल्दी तैयार करा कर अपने साथ कचहरी ले गया। वहां एक अधेङ व्यक्ति को दिखा कर कहा – अब तुम इसके साथ रहोगी। मैं ने तुम्हें बेच दिया है। मुझे जमीन खरीदने के लिये पैसे चाहिये थे।“ वह जब रो -रो कर ऐसा ना करने की याचना करने लगी। तब पति ने बताया, यह काम कचहरी में लिखित हुआ है। अब कुछ नहीं हो सकता है।
उसकी कहानी सुन कर , मुझे जैसे बिजली का झटका लगा। मैं अविश्वाश से, चकित नेत्रों से उसे देखते हुए बोलने लगी – “ यह तो नाजायज़ है। तुम गाय-बकरी नहीं हो। तुम उसकी जायदाद भी  नहीं । जो दाव पर लगा दे या तुम्हारा सौदा कर दे। उसने तुम से झूठ कहा है। यह सब आज़ के समय के लिये कलकं है।”
उसने बङी ठंङी आवाज़ में कहा – “ तब मैं कम उम्र की थी। यह सब मालूम नहीं था। जब वह मुझे पैसे के लिये बेच सकता है। तब उसकी बातों का क्या मोल है। अब सब समझती हूँ। पर यह सब तो पुरानी बात हो गई।”

मैं अभी भी सदमें से बाहर नहीं आई थी। गुस्से से मेरा रक्त उबल रहा था। आक्रोश से मैं ने उससे पूछ लिया – “ फिर क्यों रो रही हो ऐसे नीच व्यक्ति के लिये?”

उसने सर्द आवाज़ में जवाब दिया – “ आज सुबह लंबी बीमारी के बाद उसकी यानि मेरे पहले पति की मृत्यु हो गई। उसके परिवार के लोगों ने खबर किया है । पर तुम्हीं बताअो, क्या मैं विधवा हूँ? मेरा बूढा तो अभी जिंदा है। मैं इस बात लिये नहीं रो रहीं हूँ। उसकी मौत की बात से मेरे बूढे ने कहा, अगर मैं चाहूँ, तो विधवा नियम पालन कर सकती हूँ। मैं रो रही हूँ , कि मैं किसके लिये पत्नी धर्म निभाऊँ? मैंने तो दोनों के साथ ईमानदारी से अपना धर्म निभाया है।

उसकी बङी-बङी आँखो में आँसू के साथ प्रश़्न चिंह थे। पर चेहरे पर वही पुरानी मोनालिसा की रहस्यमयी , उदास, दर्द भरी हलकी सी हँसी , जो हमेशा उसके होठों पर रहती थी।

Do what you can !!

Start where you are.

Use what you have.

Do what you can.

—Arthur Ashe

संजीदा सागर

गहरे, संजीदा सागर से

ज़िंदगी का गहरा, गूढ़ सबक़

सीखा … ….,

तेज़ उठती -गिरतीं लहरें

अपने पास आने वालों को

गिरातीं तो हैं

पर उठना ख़ुद हीं

पड़ता है.

ज़िन्दगी के जंग में

भी यही फ़लसफ़ा काम आता है .

Rules of love – Rule 31


If you want to strengthen your faith, you will need to soften inside. For your faith to be rock solid, your heart needs to be as soft as a feather.

Through an illness, accident, loss or fright, one way or another, we are all faced with incidents that teach us how to become less selfish and judgmental and more compassionate and generous.

Yet some of us learn the lesson and manage to become milder, while some others end up becoming even harsher than before…

Shams Tabriz spiritual instructor of Rumi ❤️❤️

Finance ministry news

क़र्ज़ और ब्याज में डूबा देश

क्या किसी को समझ नहीं आता ?

क्या इनसे बचाने का उपाय नहीं?

इसलिए देश को पढ़े लिखे

समझदार नेताओं की ज़रूरत है .

नई नई योजनाओं के लाभ की बातें होतीं है.

ऐसी बर्बादी रोकने की बातें कौन करेगा ?

इन्हें बचा लेने से हीं तो उस धन से

ना जाने कितने काम हो जायेंगें

इसके लिए ईमानदार , खुले दिमाग़ वाले और

अपने स्वार्थ से ऊपर देश को रखने वाले नेता चाहिये

जो हम सबों को जाति आधारित वोट बैंक नहीं

अनमोल मानव संसाधन समझ कर सम्मान करे .

 News courtesy – https://www.finmin.nic.in/hi

News Courtesy – Inshorts

  • हर दिन 1450 करोड़ रुपये का ब्याज चुका रही है केंद्र सरकार, जानिए कैसी है देश की आर्थिक स्थिति?
  • भारत का आज भी आमदनी का आधा हिस्सा कर्ज चुकाने में चला जाता है.

By The Time You Read This, We Could All be Dead जान की कीमत इतनी कम क्यों है?

हमारे यहाँ जान की कीमत इतनी कम क्यों है?

आज के मैटेरियलिस्टिक जीवन …

भौतिकवाद ने सुन्न….

संवेदनाशून्य कर दिया है?

या हम सब सो रहे हैं?

या हम सब भी जिंदगी के ऐसी हीं किसी जद्दो ज़हद में फंसें हैं?

NEWS _ By The Time You Read This, We Could All be Dead

East Jaintia Hills (Meghalaya):

13 Feared Dead In Flooded “Rat Hole” Mine In Meghalaya
Unsafe rat-hole coal mining have been taking place illegally despite a National Green Tribunal ban in place in Meghalaya since 2014.

Thirteen days after the incident, all that is left inside the labourers’ tents — just a few metres from where they worked and are feared to have died — are a few broken egg shells, dirty old slippers, empty plastic bottles and a layer of black coal on the soil. Tired, the grandfather stopped waiting and returned to his village.

……The ‘sardar’ didn’t tell me that my son won’t come back,” Ali says, his voice breaking. The three members of his family were told they would get paid at the end of every week. But when they entered the mine on the sixth day, they did not come back