दस लाख डालर का इनाम – क्या दूसरे ग्रहों पर जीवन है? (रिसर्च )

दस लाख   डालर का इनाम – क्या आप मानते है कि एलियन या पर ग्रहवासी होते है ? अगर हाँ, तब आपके लिए इनाम जीतने का सुनहरा अवसर है। यह चर्चा का विषय, बहुत पुराना है।अभी हाल में , 20 जुलाई  2015 को लंदन में विख्यात वैज्ञानिक स्टीफेन हौकिंस ने रूस के उद्धमी यूरी मीलनेर  के सौजन्य से  दस करोड़ डालर के  एक एलियन ख़ोज कार्यक्रम की शुरुआत की है। 

और भी जीवन है हमारे सिवा   – विद्धवान, स्टीफेन हौकिंस को अन्य ग्रहों पर जीवन होने का पूर्ण विश्वाश है। उनका मानना है कि  इस विशाल अन्तरिक्ष में हम अकेले  नहीं है। जीवन युक्त अन्य ग्रह भी हैं। जिसे वे खोजना चाहतें हैं। इस विषय पर खोज और अध्ययन चल रहें   है। अपने खोज को आगे बढ़ाने के लिए इस अभियान में एक अनोखा कदम उठाया गया  है। अन्य ग्रहों पर जीवन या सभ्यता संबन्धित सब से अच्छा संदेश या सूचना देनेवाले को दस लाख डालर  इनाम  की घोषणा की गई  है। 

हमारी प्राचीन मान्यताएं-    हमारे प्राचीन ग्रन्थों और किवदंतियों में स्वर्ग, पाताल और मृत्यु लोक की चर्चा मिलती है।

राजा बली की कहानी, नागलोग की किवदंतियाँ, रामायण में अहिरावण की बातें पाताल से जुड़ी  है। माना जाता है कि हमारी धरती या मृत्यु लोक के नीचे सात  और ऊपर सात  लोक है, जहां हमारे जैसा जीवन है।मानवों,पशु,पक्षियों,वनस्पतिओं  का निवास स्थल हमारी धरती है। देवी-देवताओं, पुण्य आत्माओं , अप्सराओ आदि  स्वर्ग में रहतें हैं।जो ऊपर के सात लोको में आता है। इसी तरह नीचे के सात लोकों अर्थात  पाताल लोक में राक्षसों, दैत्यों  , असुरों और नागों  का निवास स्थल है।

  पाताल के सात लोक  निम्नलिखित  है-

  1. अतल

  2. वितल

  3. सुतल

  4. रसातल

  5. तलातल

  6. महातल

  7. पाताल

इसी प्रकार धरती  से ऊपर सात लोकों की चर्चा होती है।मान्यता है कि ये सात लोक   देवी-देवताओं, आत्माओं, ऋषी-मुनी, अप्सराओं, पितरों आदि  का निवास स्थल है. स्वर्ग लोक या जो सात लोक ऊपर  है ,वे है – 

1.  भू

2. भुवः

3. स्व

4 . मह

5. जन

6. तप

7. सत्य

हमारे ग्रंथो में इस विषय की विस्तृत चर्चा मिलती है जिसमें दूसरे लोकों , वहाँ के जीवन, पृथ्वी से दूरी जैसी बातों का  उल्लेख है। इतनी विस्तृत जानकारी शायद हीं कहीं मिलती है।  पर सवाल है, क्या यह सब मात्र कल्पना है या सत्य? इसकी सत्यता की पुष्टि कैसे हो? शायद इन खोज अभियानों से कुछ मदद मिले।

Are we alone in the dark – or Aliens exist? (Latest Research )

ALIENSDo aliens exist– This is a controversial topic. Debate is going on. Mystery of existence of life on other planets is still matter of discussion and research.

Hindu cosmology Hindu mythology and cosmology explains about trailokya or triple world. It believes the existence of three worlds – prithvi, akash and patal.

Stephen Hawking – According to genius scientist Stephen Hawking “It’s time to commit to finding the answer to search for life beyond Earth,” “We are alive, we are intelligent, we must know”. “Mankind has a deep need to explore, to learn to know,” “We also happen to be sociable creatures. It is important to us to know if we are alone in the dark.”

Latest news – Well known physicist, Stephen Hawking and Russian entrepreneur, Yuri Milner, announced the launch of $100 million project on – Breakthrough Initiative, a new project to attempt to detect life in the Cosmos on July 20, 2015, in London.

आनर किलिंग या अपने सम्मान की ख़ातिर हत्या ( सामाजिक समस्याएँ )

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सम्मान के रक्षा के लिए, परिवार या उसके अन्य सदस्यों द्वारा उसी परिवार केकिसी एक सदस्य की हत्या करने या उसे अस्वीकृत किया जाना आनर किलिंगकहलाता है। इसकी शिकार ज़्यादातर लड़कियाँ हीं होती हैं।

एक और आनर किलिंग 

हमारे समाज में एक और आनर किलिंग होता है।जिसके लिए ना सज़ा है ना सज़ा का प्रावधान। मज़े की बात है कि समझते सब है,पर ना समझ बन कर। अक्सर कुछ परिवारों में लड़कियों के बेमेल, गलत, बेढंगे या  धोखापूर्ण विवाह हो जाते हैं। ऐसे में इसे सुलझाने, संभालने या सहारा देने की कोशिश के बदले लड़कियों को दोषी ठहराया जाता है। ताकि समाज में उस परिवार की इज्ज़त बनी रहे। मतलब, समस्या का हल नहीं निकाला जाता है।ऐसे में लड़की को उसके भाग्य की दुहाई दी जाती है और उसी परिस्थिति रहने और झेलनेका ज्ञान दिया जाता है। अगर लड़की ऐसा नहीं करती है, तब गलती छुपाने के लिए उसे हीं गलत ठहराया जाता है। यह आनर किलिंग हत्या नहीं तिल –तिल मरने की सज़ा होती है।

क्या ऐसे में कुछ किया जाना चाहिए? या लड़की को लड़की होने की सज़ा मिलते रहना चाहिये?

 

 

 

images taken from internet.

विश्व जैव विविधता दिवस #The International Day for Biological Diversity (IDB)

 

हमारा पर्यावरण
हमारा पर्यावरण

२२ मई का दिन आज के वैश्विक परीप्रेक्ष में पूरी दुनिया में महत्वपूर्ण हो गया है। इस दिन को विश्व जैव विविधता दिवस या विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस के रूप में मनाने का निश्चय संयुक्त राष्ट्र ने किया है। इसे अन्तर्राष्ट्रीय पर्व कहा गया है।

यह संसार विविध जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों से भरा है। सभी किसी ना किसी रूप से एक दूसरे से जुड़े है। पर आज बदलते समय और पर्यावरण से छेड़-छाड़ ने प्रकृती पर असर डालना शुरू किया है। बहुत से जीव और पेड़ पौधे लुप्त हो गए और कुछ लुप्त होने की कगार पर हैं। इन्हे बचाने के लिए जागरूकता जरूरी है। अतः यह प्रयास प्रसंशनीय है।

यह प्रकृति हमारे लिए महत्वपूर्ण है। यह बात हमारे गुणी-जनों और ऋषी-मुनियों ने बहुत पहले ही समझ लिया था। इसी लिए नदियों, वनों, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों आदि को पूजा और आध्यात्म से जोड़ दिया था। ताकि उनका संरक्षण और सम्मान हो। जिन बातों की आलोचनाएं होती थी। उनका महत्व आज स्पष्ट है। अगर हम आज भी अपनी पुरानी संस्कृती को याद रखें , तब हर दिन ही विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस होगा।

आप्रेशन मुस्कान और आप्रेशन स्माइल

मानव तस्करी कोई नया विषय नहीं है। प्राचीन समय से दास खरीदने-बेचने, गुलाम और बँधुआ रखने की प्रथा रही है। पर आज के सभ्य समाज में इन्सानों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार निंदनीय है। अनपढ़, गरीब, गुमशुदा और कमजोर लोगों को अक्सर इस तरह के जाल में फंसाया जाता रहा है।
इसी प्रकार गमशुदा बच्चों के लिए आप्रेशन स्माइल चलाया जा रहा है।
नेपाल के हालिया भूकंप के बाद ऐसी बातों की संभावना बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए आप्रेशन मुस्कान एक जुलाई से शुरू किया जा रहाहै। यह एक सराहनीय प्रयास है। उम्मीद है उत्तर प्रदेश सरकार  यह काम  सुचारु रूप  करेगी।

हमारी टूटती – बिखरती विरासतें( जागरूकता )

विरासतों को संरक्षित किया जाये या नहीं ? यह चर्चा का विषय है। कुछ लोग पुरानी चीजों पर किए जा रही खर्च को व्यर्थ मान सकतें है। पर विरासतों को संरक्षित करनेवाली विभिन्न संस्थाएं इसके लिए प्रयासरत है। यूनेस्को (UNESCO) संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization) अनेक विश्व विरासतों को संरक्षित कर रही है।
कुछ विरासतें प्रकृतिक आपदाओं से नष्ट हो रही है, और कुछ हमारी नादानियों से। युद्ध और आपसी तकरार का आक्रोश निरीह और निर्जीव धरोहरों पर उतारने की नासमझी प्राचीन समय से चला आ

बुद्ध प्रतिमा, साँची स्तूप
बुद्ध प्रतिमा, साँची स्तूप

रहा है। आज भी विभिन्न आतंकी संगठन इस तरह के काम में लगे हैं।
बामियान में बुद्ध के 58 और 38 मीटर ऊँची मूर्तियाँ, 2000 हज़ार वर्ष पुरानी सभ्यता के पलम्यरा के अवशेष जो रेगिस्तान में लगभग 120 एकड़ में फैले है, इराक का हातरा या प्राचीन इराक़ी शहर निमरूद आदि ना जाने कितने धरोहर नष्ट किए जा रहें है।
क्या इस तरह के तोड़-फोड़ को रोका नहीं जाना चाहिए? यह क्षति अपूर्णिया है। ये विरासतें हमारी धरोहर हैं।

#Spellingbee भरतीय बच्चे और स्पेलिंग बी ( समाचार )

यह सम्मान और खुशी की बात है, कि हमारे देश  के बच्चे विदेशों में भी सफलता के परचम लहरा रहें हैं. अमेरिका में होने वाले अंग्रेजी भाषा के प्रतियोगिता  लगातार पिछले आठ वर्षों से भरतीय मूल के बच्चे जीतते आ रहें है. स्पेलिंग बी अमेरिक की  महत्वपूर्ण और मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता है. यह प्रत्येक वर्ष आयोजित होती है.

इस से यह  बात स्पष्ट हो जाती है कि  हमारे बच्चों में योग्यता की कमी नहीँ है. सही महौल और उचित शिक्षा मिलने पर वे कहीँ भी सफलता प्राप्त कर सकते हैं. इस वर्ष 13 वर्षीय वन्या और 14 वर्षीय गोकुल ने यह कठिन प्रतियोगिता जीता है. इन दोनो बच्चों को बधाई.

नेशनल ग्रीन ट्रीब्युनल (महत्वपूर्ण जानकारी )

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल अधिनियम 2010 में पर्यावरण के मुद्दों से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटाने और संभालने के लिए बना एक विशेष न्यायाधिकरण है। यह भारत की संवैधानिक प्रावधान के तहत बना अधिनियम है। जो भारत के नागरिकों को एक स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराना चाहता हैं।

जून 1992 में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के रियो डी जनेरियो शिखर सम्मेलन में भारत ने भाग लिया। इसके बाद हमारे देश में विभिन्न राज्यों में होनेवाले प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय क्षति को नियंत्रित करने के लिए इसकी स्थापना की गई।

यह ट्रीब्युन पर्यावरण सुरक्षा और नदियों को सफाई के लिये सजग है. विशेष कर नदियों और सागर के किनारे स्थित होटलों, रिसॉर्ट्स, शहरों द्वारा नदियों में जानेवाले कचरे और गंदगी को रोकने के लिये प्रयासरत है.

पुरी, टिहरी, कश्मीर का डल झील, लक्ष्यद्वीप, गोआ, महाबलीपुरम, हरीद्वार आदि द्वारा कचरों को नदियों व सागर में प्रवाहित करने पर कठोर प्रतिक्रियाएँ दिखाई है. यह सराहनीय  कदम है.

सुप्रीम कोर्ट का स्वागत योग्य फैसला- धारा 66 ए ( समाचार )

सुप्रीम कोर्ट ने एक सराहनीय फैसला लिया है। धारा 66 ए ( आईटी – एक्ट ) को कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। यह एक बड़ा फैसला है। जो तत्काल लिया गया है। यह धारा सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत अभिव्यक्ती को रोकने का काम करती रही है। जिसके वजह से अनेक लेखकों, व्यंगकारों, विधार्थियों और सामान्य जन को सजा झेलनी पड़ी है।

धारा 66 ए क्या है? – यह धारा सोशल मीडिया पर लिखे जा रहे विषयों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया कानून है। धारा धारा 66 ए ( आईटी – एक्ट ) में सोशल मीडिया (इंटरनेट, मोबाईल, सोशल नेट्वर्किन साईट आदि ) पर आपतिजनक बातें लिखने पर सजा का प्रावधान है। जिस वजह से फेस बुक, इंटरनेट, मोबाईल मैसेजों आदि में लिखे गए व्यंगों और विचारों के कारण अनेक लोगों को सज़ा मिली है।

सुप्रीम कोर्ट का विचार – सोशल मीडिया पर अक्सर लोग अपनी व्यक्तिगत राय और विचार लिखते हैं। अतः धारा 66ए मन की बातों की अभिव्यकी में बाधक है। इसके अलावा बहुत बार, कुछ बातें हल्के तौर पर या व्यंग के रूप में भी लिखी जाती हैं। अतः कोर्ट ने इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति माना है। व्यक्तिगत अभिव्यक्ति भारत के हर नागरिक का अधिकार है।

सावधानी – पर इसका अर्थ यह नहीं है कि सोशल मीडिया पर आपतिजनक या ऊटपटाँग बातें लिखी जाये। साथ ही व्यक्तिगत हमले या अशोभनीय बातें लिखने से भी बचना चाहिए। भारत के अच्छे नागरिक होने के कारण ऐसी बातें भी नहीं लिखनी चाहिए जिस से समाज में आस्थिरता उत्पन्न हो। अर्थात किसी भी रूप में इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

शुभ नव वर्ष– Happy New Year (हिंदी या चंद्र कैलेंडर )

आज हिन्दी कैलेंडर के मुताबिक नया साल शुरू हो रहा है। यह प्राचीन हिंदू परंपरा के आधार पर आधारित एक चंद्र कैलेंडर है। यह वर्ष / विक्रम संवत् 2072 शुरू हो रहा है। हमारे त्योहार की तिथियाँ इस पर हीं आधारित होतीं हैं।

विक्रम संवत् उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित कैलेंडर है। इसी दिन विक्रमादित्य ने उज्जैन पर आक्रमण कर शकों को भगाया था और उस दिन से इस कैलेंडर का चलन शुरू किया था। यह चंद्र महीने और सूर्य के नक्षत्रों पर आधारित है। यह चैत्र के महीने में नया चाँद के पहले दिन से शुरू होता है। यह प्रायः अंग्रेज़ी के मार्च-अप्रैल में पड़ता है। इस दिन से नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि का त्योहार भी शुरू होता है। यह नेपाल का आधिकारिक कैलेंडर है।

इस्लामी कैलेंडर या हिजरी कैलेंडर, पारसी कैलेंडर, मराठी नव वर्ष – गुड़ी पड़वा, कश्मीरी नया साल- नवरस, पंजाब का वैशाखी, ईसाई परंपरा या अँग्रेजी कैलेंडर आदि अनेकों कैलेंडर है।

तिथि की गणना के लिए बनाए गए कैलेंडरों में कुछ की गणना सूर्य के उगने और डूबने से होता है, जैसे- अँग्रेजी कैलेंडर। ठीक इसी प्रकार अन्य कैलेंडरों में चंद्रमा के निकलने और अस्त होने से दिन की गिनती होती है। जैसे विक्रम संवत या हिन्दी कैलेंडर पूर्णिमा या अमावस्या से दिनों की गिनती करते है।

अच्छा है हमारे पास नया वर्ष मनाने के अवसर अनेकों बार आते है। पर इन सबों में सर्वाधिक प्रचलित नव वर्ष है- एक जनवरी या अँग्रेजी कैलेंडर। पर क्या यह अच्छा नहीं है कि हम अपने-अपने नव वर्ष को भी उत्साह और जोश से मनाएँ?