ज़िंदगी के रंग -124

यादें वे सारी जीती जागती मंजर दिखाती हैं, कि

जिंदगी में कुछ तय नहीं,

पर इस दुनिया में आना और जाना तय है।

7 thoughts on “ज़िंदगी के रंग -124

  1. ज़िंदगी के रंग… बहुत खूब …

    बेह्ती नदिया सी…
    दो तट्टो के बीच…
    तट्ट ही हैं तय लगते
    पर तट्ट भी कहाँ है तय यहाँ

    हर एक बूंद है लय
    लय हो या प्रलय
    सब कुछ है तय यहाँ
    तय तो कुछ भी नही यहाँ…

    तय तो सब कुछ है
    पर तय कुछ भी नही…

    तय तो पल पल है..
    पर तय एक पल भी नही

    तय तो हर चीज़ है यहाँ
    पर हैरान हूँ इतना की
    तय तो कुछ भी नही यहाँ…

    Like

Leave a reply to Madhusudan Cancel reply