ज़िंदगी के रंग -124 February 20, 2019February 20, 2019 Rekha Sahay यादें वे सारी जीती जागती मंजर दिखाती हैं, कि जिंदगी में कुछ तय नहीं, पर इस दुनिया में आना और जाना तय है। Rate this:Share this: Share on Facebook (Opens in new window) Facebook More Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on X (Opens in new window) X Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Like Loading... Related
ज़िंदगी के रंग… बहुत खूब … बेह्ती नदिया सी… दो तट्टो के बीच… तट्ट ही हैं तय लगते पर तट्ट भी कहाँ है तय यहाँ हर एक बूंद है लय लय हो या प्रलय सब कुछ है तय यहाँ तय तो कुछ भी नही यहाँ… तय तो सब कुछ है पर तय कुछ भी नही… तय तो पल पल है.. पर तय एक पल भी नही तय तो हर चीज़ है यहाँ पर हैरान हूँ इतना की तय तो कुछ भी नही यहाँ… LikeLike Reply
Very well said Rekha. 🤝
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Thank you 😊
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You are most welcome
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BILKUL SAHI ……EKDAM SATYA.
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शुक्रिया मधुसूदन.
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ज़िंदगी के रंग… बहुत खूब …
बेह्ती नदिया सी…
दो तट्टो के बीच…
तट्ट ही हैं तय लगते
पर तट्ट भी कहाँ है तय यहाँ
हर एक बूंद है लय
लय हो या प्रलय
सब कुछ है तय यहाँ
तय तो कुछ भी नही यहाँ…
तय तो सब कुछ है
पर तय कुछ भी नही…
तय तो पल पल है..
पर तय एक पल भी नही
तय तो हर चीज़ है यहाँ
पर हैरान हूँ इतना की
तय तो कुछ भी नही यहाँ…
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बहुत सुंदर कविता लिखी है आपने. प्रशंसा के लिए आभार .
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