कुर्बानी-व्यंग, Staire

Charity begins at home…….????

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शाश्वत रूप से अनुत्तरित एक प्रश्न हैजान की कीमत इतनी कम क्यों ?

पर अब एक नया प्रश्न हैजान की कीमत है भी या नहीं ?

और करनी है प्रिय वस्तु की कुर्बानी तब

अपनी जान अनमोल है ना ?

होगा वरना स्वार्थ पूर्ण।

सबसे मार्मिक स्थिति है उस बच्चे की है,

जो अपने घर में अपनों के साथ सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा हो

ना जाने कब क्या हो जाए ?

Bihar Man Seeks Permission for Human Sacrifice, Says Son Will be First -Residents of the village say Singh is known as “Pagla baba” (crazy godman) because of his wayward behaviour which includes often walking around naked or carrying a human skull in his hand.

courtesy- Inserts & News 18.

84 thoughts on “कुर्बानी-व्यंग, Staire

    1. बिलकुल , हद तो यह है की दूसरे की जान लेने का विचार मन में कैसे आता है ?
      क़ुर्बानी देनी है तो बुराइयों की दो .

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      1. यह विचार इनके मन मे इसलिए आता है क्योकिं कुर्बानी दूसरे की होती है। कोई इनकी जान लेगा तो यह खुद ईसे गलत बता देगें।।

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      2. लोग भगवान शिव का नाम लेकर भाँग इत्यादि नशे करते हैं यदि सच मे शिव भक्त है तो धतूरा खाएं शरीर पर साँप लपेटे। वन मे रहे

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      3. वह तो इसलिए की जीवन सुरक्षित है यदि इतने भक्त हैं तो धतूरा भी खाएं। परन्तु काम वही करते हैं जिसमे अपना नुकसान न हो

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      4. ऐसी क्या बात है ? अगर बात शालीनता के दायरे में होगी तब तो problem नहीं है .

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      5. मैं उन्हें नहीं जानती. ब्लॉग की simple दोस्ती में मैं यह नहीं कर सकती. Sorry.

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      6. * यही तो स्वार्थ है , जो अच्छा लगे बस वही करो . एक बात लोग नहीं समझते कि धार्मिक रूप से काम में लाए जाने वाली चीज़ें( भांग, चतुराई) वास्तव में उपयोगी है व यह दर्शाता है कि उनका औषधीय उपयोग होना चाहिए .

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  1. शाश्वत रूप से अनुत्तरित एक प्रश्न है – जान की कीमत इतनी कम क्यों ?

    पर अब एक नया प्रश्न है – जान की कीमत है भी या नहीं ?

    बहुत खूब और सत्य पूछ लिया।या यूं कहें बिल्कुल सत्य कहा।

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