लेखक के हमदम …हमख्याल

अगर बने लिखनेवाले के हमदर्द,

चाहो या ना चाहो

हर बात पन्नों पर ,

शब्द बन उकेर दिए जाएँगे .

यादों में रहने के साथ

कहानियों – कविताओं में क़ैद कर लिए जाओगे.

नाराज़गी भी खट्टे-मीठे उलाहनों में

लिखें जाएँगे .

ज़िंदगी जब भी देगी दस्तक ,

हर क़यामत को,

दर्दभरी कविताएँ

ग़ज़ल- शायरी बना सुनायें जाएँगे.

अजीब सा है यह रिश्ता .

रहो या ना रहो,

जाने नहीं देंगे.

उत्कृष्ट कृति ,जीती जागती कविताएँ बना

लिखेगें ख़ामोशी भरे लफ़्ज़ों में ……..

गढ़ी अनगढ़ी पंक्तियाँ और

सुंदर सहज कहानियों में………

 

11 thoughts on “लेखक के हमदम …हमख्याल

Leave a reply to theconfidentguy Cancel reply