काश तराशे गए होते!!!!

ताज देख इसकी ,

बुनियाद देखने का ख़्याल आया.

वह भी क्या संगेमरमर की होगी ?

सफ़ेद चिकनी …ख़ूबसूरत ?

नींव में दबे

अंधेरी दुनिया में, वे वहाँ साँस कैसे लेते होंगे ?

क्या वे सोचते होंगे – काश तराशे गए होते,

मन्दिरों में देव बने

या ताज में सजें होते?

मज़बूत , कठोर ना होते

तब यहाँ ना होते

सिर्फ़ बोझ संभालते ……

Image courtesy- Chandni Sahay.

9 thoughts on “काश तराशे गए होते!!!!

    1. बहुत बार मज़बूती से काम करने वालों के साथ ऐसा होता है. वे सारा बोझ संभालने वाले बन जातें हैं.

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