नज़रें उठाना और गिराना

ढेरों बातें और यादें बटोरे

गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे

इंतज़ार में,  राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..

उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना

सारे ल़फ्ज ….अल्‍फाज़ चुरा ले गया।

11 thoughts on “नज़रें उठाना और गिराना

  1. kya baat……khubsurat…….
    उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना
    सारे ल़फ्ज ….अल्‍फाज़ चुरा ले गया…..
    aur ham tijori khol lut jaane men khoye rahe…….
    kab aaye aur chale gaye pata hi nahi chala.

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