किसी को अपनी आदत बनाना ठीक नहीं,
लोगों को मौसम की तरह बदलते देखा है।
Rate this:
Share this:
- Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest
- Share on Tumblr (Opens in new window) Tumblr
- Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
- Share on Pocket (Opens in new window) Pocket
- Share on Reddit (Opens in new window) Reddit
- Share on X (Opens in new window) X
- Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
Nice stuff
LikeLiked by 1 person
thank you 🙂
LikeLiked by 1 person
Welcome
LikeLiked by 1 person
क्या करे दिल दिमाग की तरह सोचता कब है।
LikeLiked by 1 person
🙂 सच कह रहें है आप । दिल अौर दिमाग का यह झगङा पुराना है। यह झगङा नहीं हो अौर दोनों एक साथ , एक जैसी बात सोंचेते तो जिंदगी बङी आसान हो जाती।
LikeLike
बहुत सही बात है यह रेखा जी । इस पर कई फ़िल्मी गीत याद आ रहे हैं मुझे : 1. अरमानों के इस गुलशन में तुम आए हो सावन की तरह, यार बदल ना जाना मौसम की तरह’, 2. तुमने रख तो ली तसवीर हमारी पर ये न हो कि जिस तरह मौसम बदलता है, वैसे ही तुमको भी देखूं रंग बदलते हुए, 3. कुछ लोग यहाँ पर ऐसे हैं, हर रंग में रंग बदलते हैं, हम उनको और समझते हैं पर वो कुछ और निकलते हैं ।
LikeLiked by 1 person
यही सच्चाई है . लोग कब बदल जाये कहना मुश्किल है . ये सारे गीत बड़े सही और खूबसूरत है और सच्चाई व्यक्त करतें है .
बहुत आभार आपका !
LikeLiked by 1 person
That’s the painful part when own close relationship changes like seasons
LikeLiked by 1 person
Yes, it is .
LikeLiked by 1 person