हमने तो जिंदगी को कभी ना जाँचा ना परखा ना इम्तहान लिया,
फिर यह क्यों रोज़ नये इम्तहान लेती, परखती रहती है?
सोने की तरह कसौटी पर कस कर अौर कभी
पत्थर पर घिस कर हिना बना हीं ङालेगी शायद।
कहते हैं
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद ……..
हमने तो जिंदगी को कभी ना जाँचा ना परखा ना इम्तहान लिया,
फिर यह क्यों रोज़ नये इम्तहान लेती, परखती रहती है?
सोने की तरह कसौटी पर कस कर अौर कभी
पत्थर पर घिस कर हिना बना हीं ङालेगी शायद।
कहते हैं
रंग लाती है हिना पत्थर पर घिस जाने के बाद ……..