आज हम धर्म, जाति और भाषा के झगड़े में घिरी
जिंदगी में ड़ूबे है । पर ऐसे भी लोग हुए है, जो इन
सब से ऊपर उठ कर दुनिया को एक अलग नज़रिये
से देखते थे। अकबर, एक मुस्लिम शासक ने हिंदुओं
के महाकाव्य का फारसी अनुवाद करवाया, जिसमें
हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थ “गीता” भी समाहित है।
फ़तेहपुर सीकरी में एक अनुवाद – गृह की स्थापना
कर 1584-1586 में महाभारत का पहला फारसी
अनुवाद हुआ। इसे नाम दिया गया “राजमनामा”
अर्थात महायुद्ध की एक कहानी। इस अनुवाद की
विशेषता है इसमें महाभारत की घटनाओं के सुंदर
चित्रों का समनव्यय।
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