जिंदगी के रंग- 189

जब जिंदगी से कोई आजाद होता है,

किसी और को यादों की कैद दे जाता है.

सीखना चाह रहे हैं कैद में रहकर आजाद होना।

काँच के चश्मे में कैद आँखों के आँसू ..अश्कों की तरह.

ज़िंदगी के रंग -185

वर्षा सी बरसती,

अर्ध खुली भीगी आँखों के

गीले पलको के चिलमन से

कभी कभी दुनियाइंद्रधनुष सी,

सतरंगी दिखती है.

आँखों के खुलते ही सारे

इंद्रधनुष के रंग बिखर जाते हैं.

ख़्वाबों का पीछा करती

ज़िंदगी कुछ ऐसी हीं होतीं.