ज़िंदगी के रंग – 198

दुनिया में सुख हीं सुख हो,

सिर्फ़ शांति हीं शांति और ख़ुशियाँ हो.

ऐसा ख़ुशियों का जहाँ ना खोजो.

वरना भटकते रह जाओगे.

जीवन और संसार ऐसा नहीं.

कष्ट, कोलाहल, कठिनाइयों से सीख,

शांत रह कर जीना हीं ख़ुशियों भरा जीवन है……

जीवन के रंग – 36

शीतल हवा का झोंका बहता चला गया।

पेङो फूलों को सहलाता सभी को गले लगाता ……

हँस कर जंगल के फूलों ने कहा –

वाह !! क्या आजाद….खुशमिजाज….. जिंदगी है तुम्हारी।

पवन ने मुस्कुरा कर कहा –

क्या कभी हमें दरख्तों-ङालों,  खिङकियों-दरवाज़ों पर सर पटकते….

गुस्से मे तुफान बनते नहीं देता है?

हम सब एक सा जीवन जीते हैं।

गुस्सा- गुबार, हँसना-रोना , सुख-दुख,आशा-निराशा

यह सब तो हम सब के

रोज़ के जीवन का हिस्सा है!!!