अपने-आप से

ग़र ख़ुशियाँ और सुकून चाहिए,

तब अपने-आप से ना लड़ो।

ना अपने-आप से हारो।

प्यार करो अपने आप से,

ईमानदार रहो, सच बोलो।

याद रखो,

तुम्हारे सब से अपने बस तुम ही हो।

बाक़ी सब तो परखते रहते हैं।

जैसे सोना परखा जाता है

कसौटी पर घस-घस कर।

जिससे तुम कुछ पाओगे नहीं।

नियामत

खामोशियाँ सुकून बन जाए।

तनहाइयाँ भाने लगे।

परवाह न रहे लोगों की,

उनकी बातों की।

मायने ईश्वर साथ है,

सम्भालता दुनिया की ठोकरों से,

राहें दिखाता-सिखाता।

तब एकांत बन जाता है नियामत,

देता है कई प्रश्नों के जवाब

और सिखाता है सलीके से

ख़ुशगवार ज़िंदगी जीना।

ख़ामियाज़ा

कुछ लोग दिल में होते हैं ज़िंदगी में नहीं।

कुछ ज़िंदगी में होते है दिल में नहीं।

जो अपने रूह और दिल में जगह दें।

उन्हें हीं ज़िंदगी,

रूह और दिल का हिस्सा बनायें,

चाहे वे दूर हों या पास,

ग़र ना हो चाहत टूटने-बिखरने की।

सिर्फ़ पास और साथ के लिए

साथ ना निभाएँ।

रिश्ते अपनेपन के लिए होतें हैं,

ख़ामियाज़ा भरने के लिए नहीं।

सुकून अनलिमिटेड

ग़र अपना साथ ख़ुशियाँ देने लगे,

तब ख़ुद को जीतने की राहों पर हैं।

ग़र दूसरों से प्यार पा ख़ुश रहने की

ख्वाहिशें कम होने लगे,

तब ख़ुद से प्यार करने की राहों पर हैं।

ग़र दर्द भरे पलों में मुस्कुरा रहे हैं,

तब निर्भय होने की राहों पर है।

ग़र एकांत ख़ुशनुमा लगने लगा है,

तब अध्यात्म की राहों पर हैं।

यह जोखिम भरा शग़ल मीठा सा नशा है।

पर तय है, इसमें सुकून अनलिमिटेड है।

मन का सुकून

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।

कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा

रिश्ता बना कर देखो।

लोगों को अपने जीवन के

दायरे और सीमा बता कर देखो।

ग़र मन का सुकून चाहिए,

दूसरों के बदले खुद के लिए

जीवन जी कर देखो।

कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।

जीवन सार

तन थके तो आराम चाहिए।

मन थके तो सुकून चाहिए।

“जो होगा अच्छा होगा”

मन के सुकून और शांति के लिए,

यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।

कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।

गीता में छुपा है यह जीवन सार –

जो हुआ अच्छा हुआ।

जो हो रहा है वह अच्छा है।

जो होगा वह भी अच्छा होगा।

सुकून भरा दिल और रूह

सुकून भरा दिल और रूह

चंद बूँदे बरसे आसमान से।

खुला आकाश फुसफुसाया कानों में।

चैन पाने के लिए चंद क़तरे हम भी बरस जाने देते हैं,

कालिमा भरे नभ से, स्वच्छ नभ पाने के लिए।

आज़ाद छोड़ दे एहसासों औ दर्द को

बरस कर बह जाने के लिए।

ग़र पाना है सुकून भरा दिल और रूह।

Psychological fact –

Normal crying is emotional cathartic. It does have a soothing and relaxing effect. When we cry, our heart rate and breathing slow down a little and we start to calm down. We might even experience a mood boost after a good cry. Crying is useful for helping people release and express their suppressed or repressed emotions.

(Dr J Chan, a clinical psychologist at the Hong Kong Psychological Counselling Centre in Mong Kok)

कसक

ठंड में बढ़ जाती है,

गुम चोट की कसक।

रातों में बढ़ जाती हैं,

गुम और भूली-बिसरीं

यादों की कसक।

सुकून

सागर के दिल पर तिरती- तैरती नावें,

याद दिलातीं हैं – बचपन की,

बारिश अौर अपने हीं लिखे पन्नों से काग़ज़ के बने नाव।

 नहीं भूले कागज़ के नाव बनाना,

पर अब ङूबे हैं  जिंदगी-ए-दरिया के तूफान-ए-भँवर में।

तब भय न था कि गल जायेगी काग़ज की कश्ती।

अब समझदार माँझी  

कश्ती को दरिया के तूफ़ाँ,लहरों से बचा

तलाशता है सुकून-ए-साहिल।

 

दूरियाँ और दीवारें

आदत बन रहीं हैं दूरियाँ और दीवारें.

तमाम जगहों पर पसरा है सन्नाटा.

कमरों में क़ैद है ज़िंदगी.

किसी दरवाजे, दीवारों की दरारों से

कभी-कभी रिस आतीं हैं कुछ हँसी….कुछ आवाज़ें.

एक दूसरे का हाथ थामे खड़ी ये चार दीवारें,

 थाम लेतीं हैं हमें भी.

इनसे गुफ़्तुगू करना सुकून देता है.