आपका दिया, आपको समर्पित!

इतनी भी क्या है शिकायतें?

जहाँ जहाँ आप जातें है।

बातें बनाते और सुनाते हैं।

सब हम तक लौट कर आते हैं।

क्यों सब भूल जातें हैं – दुनिया गोल है।

किसी ने क्या ख़ूब कहा है –

पाने को कुछ नहीं, ले कर जाने को कुछ नहीं ।

फिर  इतनी भी क्या है शिकायतें?

हम किसी का कुछ रखते नहीं।

आपका दिया आपको समर्पित –

त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये ।

       

बस हम ही हम हों …..

रोहिंग्या  इस्लाम को मानने वाले  म्यांमार के अराकान प्रांत में रहने वाले लोग हैं।

The Rohingya people,  historically also termed Arakanese Indians  are a stateless,  Indo-Aryan people from Rakhine State, Myanmar.

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Rohingya

Rohinyang  India

 

दुनिया में बस हम ही हम हों …..

ये कैसी सोंच  है ??

कुछ कारण नहीँ समझ आता इसका .

धरती गगन ने ढेरों रंग दिये .

ईश्वर ने भी नहीँ सोचा – एक ही रंग में हो दुनिया.

फ़िर हम में इतनी निर्दयता -असहनशीलता क्यों ?

धर्म , रंग, भाषा , जाति …….के नाम पर ?

किसी को ख़त्म कर भी दिया तो क्या मिलेगा ?

किसने सही किया ?

ईश्वर ने विविधता दे कर या

मानव ने अपनी क्रूरता दिखा कर …..??