तुम्हें शायद मेरी भी ज़रूरत नहीं !!!!

ऊपर वाले ने दुनिया बनाते-बनाते, उस में थोड़ा राग-रंग डालना चाहा .

बड़े जतन से रंग-बिरंगी, ढेरों रचनाएँ बनाईं.

फिर कला, नृत्य भरे एक ख़ूबसूरत, सौंदर्य बोध वाले मोर को भी रच डाला.

धरा की हरियाली, रिमझिम फुहारें देख मगन मोर नृत्य में डूब गया.

काले कागों….कौओं को बड़ा नागवार गुज़रा यह नया खग .

उन जैसा था, पर बड़ा अलग था.

कागों ने ऊपर वाले को आवाज़ें दी?

यह क्या भेज दिया हमारे बीच? इसकी क्या ज़रूरत थी?

बारिश ना हो तो यह बीमार हो जाता है, नाच बंद कर देता है।

 बस इधर उधर घुमाता अौ चारा चुंगता है.

वह तो तुम सब भी करते हो – उत्तर मिला.

कागों ने कोलाहकल मचाया – नहीं-नहीं, चाहिये।

जहाँ से यह आया है वहीं भेज दो. यहाँ इसकी जगह नहीं है.

तभी काक शिशुअों ने गिरे मयूर पंखों को लगा नृत्य करने का प्रयास किया.

कागों ने काकदृष्टि से एक-दूसरे को देखा अौर बोले –

देखो हमारे बच्चे कुछ कम हैं क्या?

दुनिया के रचयिता मुस्कुराए और बोले –

तुम सब तो स्वयं भगवान बन बैठे हो.

तुम्हें शायद मेरी भी ज़रूरत नहीं.

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#SushantSinghRajput,

#BollywoodNepotism

चिड़ियों की मीटिंग

अहले सुबह नींद खुली मीठी, गूँजती आवाज़ों से.

देखा बाहर परिंदों की सभा है.

शोर मचाते-बतियाते किसी गम्भीर मुद्दे पर, सभी चिंतित थे

– इन इंसानों को हुआ क्या है?

बड़े शांत हैं? नज़र भी नहीं आते?

कहीं यह तूफ़ान के पहले की शांति तो नहीं?

हाल में पिंजरे से आज़ाद हुए हरियल मिट्ठु तोते ने कहा –

ये सब अपने बनाए कंकरीट के पिंजरों में क़ैद है.

शायद हमारी बद्दुआओं का असर है.

आज – २२ मार्च, जनता कर्फ़्यू

आज सुबह बॉलकोनी में बैठ कर चिड़ियों की मीठा कलरव सुनाई दिया

आस-पास शोर कोलाहल नहीं.

यह खो जाता था हर दिन हम सब के बनाए शोर में.

आसमान कुछ ज़्यादा नील लगा .

धुआँ-धूल के मटमैलापन से मुक्त .

हवा- फ़िज़ा हल्की और सुहावनी लगी. पेट्रोल-डीज़ल के गंध से आजाद.

दुनिया बड़ी बदली-बदली सहज-सुहावनी, स्वाभाविक लगी.

बड़ी तेज़ी से तरक़्क़ी करने और आगे बढ़ने का बड़ा मोल चुका रहें हैं हम सब,

यह समझ  आया.

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियाँ

मन में उठते

शोर और कोलाहल ,

हलचल , उफान ,लहरें , ज्वार भाटे

को शब्दों……

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियों में

पन्ने पर उतारने पर

ना आवाज़ होती है

ना शोर और

मन भी काव्य की

अपूर्व शांति में डूब जाता है …….

 

 

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

एक खामोश ख्याल

एक खामोश ख्याल आता है दिल में,
हर अोर है शोर,

प्यार- प्रेम करो सबसे।
पर लफ्ज़ों – रिश्तों में बधीं उलझी
प्यार भरी इस जिंदगी
से प्यार करना अौर
प्यार से असली…..

…….शुद्ध प्यार पाना
सरल है क्या ?